हर बार लहर नहीं होती, अब काम करके दिखाएं विधायक : जावड़ेकर
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केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने पहली बार चुनकर आए विधायकों को काम करने की नसीहत दी है।
उन्होंने बृहस्पतिवार को कहा कि हर बार चुनाव में लहर नहीं होती, इसलिए पहली बार चुने गए विधायकों को न सिर्फ क्षेत्र की जनता से ज्यादा घुलना-मिलना चाहिए, बल्कि 4 या 6 या उससे ज्यादा बार जीते सदस्यों से संवाद भी बढ़ाना चाहिए।
छवि निर्माण (परसेप्शन मैनेजमेंट) पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि वे भी बार-बार चुनकर सदन में पहुंच सकें। जावड़ेकर विधानभवन के तिलक हॉल में पहली बार चुने गए विधायकों को संबोधित कर रहे थे।
जनता के लिए सबकी जिम्मेदारी एक समान
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने पहली बार चुने गए विधायकों को छोटी-छोटी बातों को विशेषाधिकार का मामला न बनाने की नसीहत दी।
लखनऊ के विधानभवन के तिलक हॉल में पहली बार चुने गए विधायकों को संबोधित करते हुए जावड़ेकर ने बृहस्पतिवार को कहा कि चुनाव में निर्णायक वे मतदाता होते हैं, जो कभी प्रत्याशी से नहीं मिलते।
उनके निर्णय लेने में आपकी छवि ही काम आती है, जिसके लिए सोशल मीडिया का बेहतर ढंग से इस्तेमाल किया जा सकता है। सत्तापक्ष हो या विपक्ष, सभी सदस्य एक ही शपथ लेते हैं, इसलिए जनता के प्रति हम सबका दायित्व भी एक समान है।
सदन के भीतर कही बातों पर नहीं किया जा सकता केस
जावड़ेकर ने कहा कि सदन, समिति और सदस्य विधायिका के महत्वपूर्ण अंग हैं। लोकतंत्र के सुचारु रूप से चलने के लिए जरूरी है कि कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका एक-दूसरे का सम्मान करें।
पहले विधायिका और न्यायपालिका के लोगों में टकराहट होती थी, पर अब स्थिति वैसी नहीं रही है। सदस्यों के विशेषाधिकार बताते हुए उन्होंने कहा कि सदन के भीतर हम कोर्ट की कार्यवाही पर भी टीका-टिप्पणी कर सकते हैं और उसके लिए सदस्य पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
हमें अपनी बात रखने का विशेषाधिकार हासिल है। सदन के अंदर दिए गए वक्तव्य पर बाहर का कोई व्यक्ति भी उस सदस्य के खिलाफ मुकदमा दायर नहीं कर सकता।
40 दिन पहले और 40 दिन बाद तक नहीं हो सकती गिरफ्तारी
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ट्रेन या फ्लाइट से संबंधित शिकायतों पर भी इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों को तलब करवाया जा सकता है, लेकिन बेहतर रहेगा कि इसकी नौबत ही नहीं आए। किसी भी सदस्य के खिलाफ सिविल केसों में सत्र चलने के 40 दिन पहले से लेकर 40 दिन बाद तक उसकी गिरफ्तारी नहीं की जा सकती। अलबत्ता आपराधिक मामलों में कोई छूट नहीं दी गई है। हां, सदन के भीतर से सदस्य को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर सकती।
अब कुछ भी नहीं होता ऑफ रिकॉर्ड
जावड़ेकर ने कहा कि सदन की कार्यवाही मीडिया में आने के भी नियम-कायदे हैं। सदन की कार्यवाही से निष्कासित हिस्से को मीडिया समाचार नहीं बना सकता। हालांकि, कैमरा सामने होने से अब ऑफ रिकॉर्ड कुछ नहीं होता।
मीडिया को रिपोर्ट टेबल पर रखे जाने से पहले सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए। संसद की समितियों की कार्यवाही के दौरान प्रेस नहीं होती, इसलिए वहां न सिर्फ सदस्यों के बोलने के तरीके बदले होते हैं, बल्कि निर्णय भी बेहतर होते हैं।
दल-बदल कानून बनने से कम हुई राजनीतिक अस्थिरता
जावड़ेकर ने कहा कि दल-बदल कानून आने से पहले राजनीतिक अस्थिरता आसानी से पैदा की जा सकती थी, लेकिन अब सदस्य पार्टी व्हिप के खिलाफ जाकर वोट नहीं कर सकते।
उन्होंने कहा कि सदन के भीतर सदस्यों को असंसदीय भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए। वेल में आना भी नियमों का उल्लंघन है। सदन ऐसा करने वाले सदस्यों को सजा दे सकता है। उन्होंने मीडिया, विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच संवाद बढ़ाए जाने पर भी जोर दिया।