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यूपी: बिजली विभाग के कर्मचारियों की हड़ताल खत्म, बैठक में समझौता, निजीकरण 15 जनवरी तक टला

Tue, 06 Oct 2020 08:23 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Tue, 06 Oct 2020 08:23 PM IST
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Power workers strike back after agreement
बिजली का खंभा - फोटो : self
प्रदेश के बिजली कर्मचारियों व अभियंताओं का सोमवार से शुरू हुआ प्रदेशव्यापी कार्य बहिष्कार मंगलवार शाम को समाप्त हो गया। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति और प्रदेश सरकार की वित्त मंत्री सुरेश खन्ना व ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा की कैबिनेट उप समिति के बीच वार्ता में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के  निजीकरण का प्रस्ताव वापस लेने की सहमति बन जाने के बाद कार्य बहिष्कार समाप्त करने का एलान किया गया। दोनों मंत्रियों और मुख्य सचिव आर. के. तिवारी की मौजूदगी में संघर्ष समिति के पदाधिकारियों व पावर कार्पोरेशन प्रबंधन के बीच समझौते पर दस्तख किए गए।
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शासन की ओर से अपर मुख्य सचिव ऊर्जा व पावर कार्पोरेशन केअध्यक्ष अरविंद कुमार, राज्य विद्युत उत्पादन निगम के प्रबंध निदेशक सैंथिल पांडियन व निदेशक (कार्मिक एवं प्रशासन) ए.के. पुरवार ने समझौते पर दस्तखत किए। समझौते में कहा गया है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण का प्रस्ताव राज्य सरकार ने वापस ले लिया है। इसके अलावा पूर्वांचल निगम के संबंध में  किसी अन्य व्यवस्था का प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
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बीती देर रात तक वार्ता में भी लगभग इन्हीं मुद्दों पर सहमति बन गई लेकिन अरविंद कुमार के समझौते पर दस्तखत करने से इन्कार कर देने की वजह से टकराव बढ़ गया था। सोमवार रात में मेें वार्ता विफल हो जाने के बाद कार्य बहिष्कार का व्यापक असर नजर आने लगा था। मंगलवार को राजधानी समेत पूरे प्रदेश में बिजली आपूर्ति अस्त-व्यस्त रही। इसी बीच पावर आफिसर्स एसोसिएशन ने भी कार्य बहिष्कार में शामिल होने का एलान कर दिया जिससे हालात और बिगड़ गए। दिन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऊर्जा मंत्री व शासन के आला अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की।
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इसके बाद कैबिनेट उप समिति को संघर्ष समिति से वार्ता करके गतिरोध समाप्त करने का जिम्मा सौंपा गया। कैबिनेट उप समिति के साथ वार्ता में फिलहाल पूर्वांचल निगम का निजीकरण न करने पर सहमति हो गई। समझौते में कहा गया है कि प्रदेश में विद्युत वितरण निगमों की वर्तमान व्यवस्था में ही बिजली सुधार के लिए कर्मचारियों व अभियंताओं को विश्वास में लेकर सार्थक कार्रवाई की जाएगी। कर्मचारियों व अभियंताओं को विश्वास में लिए बिना प्रदेश में कोई निजीकरण नहीं किया जाएगा।

यह भी सहमति हुई है कि वितरण क्षेत्र को भ्रष्टाचार को मुक्त करने, बिलिंग व वसूली का लक्ष्य प्राप्त करने तथा उपभोक्ताओं को पूर्णत: संतुष्ट करते हुए विद्युत उपकेंद्रों को आत्मनिर्भर बनाने में संघर्ष समिति प्रबंधन का पूरा सहयोग करेगी। सुधार की इस कार्यवाही की 15 जनवरी 2021 तक ऊर्जा मंत्री, प्रबंधन व संघर्ष समिति द्वारा मासिक समीक्षा की जाएगी। समझौते में स्पष्ट लिखा गया है कि वर्तमान आंदोलन के कारण किसी भी संविदा कर्मी, बिजली कर्मचारी, अवर अभियंता एवं अभियंता के विरुद्ध किसी प्रकार की उत्पीड़न की कार्रवाई नहीं की जाएगी।

आंदोलन के दौरान जिन भी स्थानों पर बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों, अभियंताओं अथवा संघर्ष समिति के पदाधिकारियों, सदस्यों के खिलाफ विभिन्न थानों में दर्ज हुए मुकदमों को बिना शर्त वापस लिया जाएगा। संघर्ष समिति की ओर से संयोजक शैलेंद्र दुबे, अखिलेश कुमार सिंह, वीपी सिंह, प्रभात सिंह, गोपाल बल्लभ पटेल, जय प्रकाश, माया शंकर तिवारी, सुहेल आबिद, परशुराम, प्रेमनाथ राय, डी.के. मिश्रा आदि ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।

राजधानी समेत प्रदेश तमाम इलाके अंधेरे में

बिजली कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार का दूसरे दिन व्यापक असर दिखाई दिया। राजधानी समेत पूरे प्रदेश में आपूर्ति व्यवस्था लड़खड़ा गई। सोमवार से शुरू हुए कार्य बहिष्कार में मंगलवार को पावर आफिसर्स एसोसिएशन के भी शामिल हो जाने से विद्युत उपकेंद्रों पर कामकाज लगभग ठप सा हो गया है। फाल्ट आदि ठीक करने का काम बंद रहा जिससे लोगों को घंटों अंधेरे में रहना पड़ा। राजधानी में गोमतीनगर का बड़ा हिस्सा शाम से अंधेरे में डूबा था।

वीवीआइपी इलाकों समेत राजधानी के बड़े हिस्से में बिजली आपूर्ति प्रभावित रही। प्रदेश के लगभग सभी जिलों में किसी न किसी रूप में बिजली आपूर्ति पर असर पड़ा। ट्रांसमिशन व वितरण लाइनों में गड़बड़ी, ट्रांसफार्मर की खराबी, केबल फाल्ट व अन्य तकनीकी वजहों से बंद हुई आपूर्ति दुरुस्त नहीं हो पाई। शासन की ओर से किए जा रहे वैकल्पिक इंतजाम के दावे धरे के धरे रह गए। कार्य बहिष्कार समाप्त होने से सरकार के साथ-साथ उपभोक्ताओं ने भी राहत की सांस ली है।
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