बिजली दरें बढ़ने से आम आदमी परेशान पर बिजली कंपनियों को होगा जबरदस्त मुनाफा
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उत्तर प्रदेश में पूर्ववर्ती राज्य विद्युत परिषद का पुनर्गठन कर बिजली कंपनियों का गठन किए जाने के बाद पहली बार बिजली कंपनियां मुनाफे में होंगी। राज्य विद्युत नियामक आयोग की ओर से मंगलवार को जारी 2019-20 के टैरिफ ऑर्डर के अनुसार इस साल बिजली कंपनियां 278.61 करोड़ रुपये मुनाफा कमाने जा रही हैं।
आयोग के सूत्रों के मुताबिक यह पहला मौका है जब आयोग ने बिजली कंपनियों के खर्च और आमदनी में संतुलन बनाने में सफलता पाई है। इसी का नतीजा है कि 2019-20 में बिजली कंपनियों को 278 करोड़ रुपये से ज्यादा का मुनाफा अनुमानित है।
बिजली कंपनियों की तरफ से पावर कॉर्पोरेशन ने 2019-20 के लिए आयोग के समक्ष 75,199.92 करोड़ रुपये का वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) प्रस्ताव दाखिल किया था। आयोग ने 69,488.78 करोड़ रुपये का एआरआर अनुमोदित किया है। कॉर्पोरेशन ने राज्य सरकार की ओर से 9120 करोड़ रुपये की सब्सिडी मिलने की जानकारी दी थी जबकि आयोग ने इसे 9104 करोड़ रुपये ही माना है।
टैरिफ ऑर्डर के अनुसार बिजली दरों के पुनरीक्षण के बाद बिजली कंपनियों को 3872.51 करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व मिलेगा। सारे खर्चों के बाद इस साल बिजली कंपनियों को 278.61 करोड़ रुपये की बचत होगी। इसका फायदा उपभोक्ताओं को बिजली कंपनियों में जमा उनकी जमानत राशि पर ब्याज या अगले वर्ष की दरों में मिल सकता है।
लाइन हानियां 11.96 प्रतिशत तक लाने का रखा गया था लक्ष्य
आयोग के सूत्रों का कहना है कि पिछले साल बिजली कंपनियों के लिए लाइन हानियां 11.96 फीसदी तक लाने का लक्ष्य रखा गया था। इस साल का टैरिफ तय करते समय आयोग ने इसी को आधार माना है। साथ ही शत-प्रतिशत राजस्व वसूली का भी लक्ष्य रखा है।
आयोग ने अपने पिछले टैरिफ ऑर्डर में ही साफ कर दिया था कि वह तय लाइन हानियों व शत प्रतिशत राजस्व वसूली मानते हुए ही दरों का निर्धारण करेगा। अगर बिजली कंपनियां आयोग द्वारा तय मानदंडों को पूरा करती हैं तो निश्चित तौर पर मुनाफे में रहेंगी। आयोग बिजली कंपनियों की अक्षमता का बोझ उपभोक्ताओं पर डालने के पक्ष में नहीं है।
दूसरी तरफ पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारियों का कहना है कि एआरआर में काफी कटौती की गई है। आयोग ने दरों का निर्धारण और एआरआर का अनुमोदन करने की प्रक्रिया में बीते वर्षों में शासन से प्रस्तावित सब्सिडी की उस राशि को भी शामिल कर लिया है जो प्राप्त ही नहीं हुई है। इससे बिजली कंपनियों की बैलेंसशीट में तो धनराशि जुड़ गई है लेकिन वास्तव में वह मिली नहीं है।
इसलिए नहीं सुधर रही माली हालत
साल दर साल दरें बढ़ाने के बाद भी बिजली कंपनियों की माली हालत न सुधरने की मुख्य वजह भारी लाइन हानियां और खराब राजस्व वसूली है। पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन की तमाम कोशिशों के बावजूद बिजली कंपनियां लाइन हानियां कम करने और राजस्व वसूली बढ़ाने में कामयाब नहीं हो पा रही हैं।
लाइन हानियां अब भी 25-30 फीसदी से ऊपर हैं, जबकि बहुत से प्रदेशों में यह 15 फीसदी तक आ चुकी है। इसी तरह काफी खींचतान के बाद राजस्व वसूली 80-90 फीसदी तक ही हो पा रही है।