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बिजली कंपनियां 81871 करोड़ के घाटे में, पूर्वांचल निगम को 19373 करोड़ का घाटा
Mon, 05 Oct 2020 09:46 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Mon, 05 Oct 2020 09:46 PM IST
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Electricity
- फोटो : पेक्सेल्स
प्रदेश की बिजली कंपनियों का घाटा 81871 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसमें सबसे ज्यादा 19373 करोड़ रुपये का घाटा पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में है। पूर्वांचल में उपभोक्ताओं को दी जा रही बिजली की कीमत का महज 62 फीसदी राजस्व ही वसूल हो पा रहा है जबकि लाइन हानियां भी 20 प्रतिशत से ज्यादा है। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के खिलाफ कर्मचारियों व अभियंताओं के आंदोलन के बीच पावर कार्पोरेशन प्रबंधन ने आंकड़े जारी करके निजीकरण के प्रस्ताव के पक्ष में तर्क रखे हैं।
अपर मुख्य सचिव ऊर्जा व पावर कार्पोरेशन के अध्यक्ष अरविंद कुमार के मुताबिक पूर्वांचल वितरण निगम में सबसे ज्यादा घाटा है। घाटे की भरपाई के लिए राज्य सरकार हर साल अनुदान देती है। 2020-21 में इसके लिए 12922 करोड़ रुपये बजट प्रावधान किया गया है। इसी प्रकार बीते वर्षों में बिजली उत्पादकों से खरीदी गई बिजली के बकाये की भरपाई के लिए पीएफसी और आरईसी से 20940 करोड़ रुपये ऋण लिया गया है जिसकी अदायगी भी प्रदेश सरकार द्वारा की जाएगी।
अरविंद कुमार ने बताया बिजली आपूर्ति के मुकाबले पर्याप्त राजस्व वसूली न हो पाने व लाइन हानियां ज्यादा होने से पूर्वांचल निगम में घाटा बढ़ रहा है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में इस निगम के अंतर्गत आने वाले शहरी क्षेत्र के उपभोक्ताओं में मात्र 61 प्रतिशत ने ही बिल जमा किया जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में मात्र 12.5 प्रतिशत ने ही अपना बिजली का बिल जमा किया है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश सरकार के प्रयासों से बिजली आपूर्ति में काफी सुधार हुआ है। सभी उपभोक्ताआें को पर्याप्त व निर्बाध बिजली मिले, इसके लिए कर्मचारियों को पूरी निष्ठा एवं ईमानदारी के साथ काम करते हुए अपने-अपने क्षेत्र की लाइन हानियां कम करके राजस्व बढ़ाना होगा।
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अपर मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश में बिजली उत्पादन क्षमता में 3973 मेगावाट की वृद्धि हुई है। इसी प्रकार ट्रांसमिशन क्षमता भी16348 मेगावाट से बढ़कर 24 हजार मेगावाट तक हो गई है। अधिकतम बिजली की मांग 24000 मेगावाट से ज्यादा हो गई है। शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे आपूर्ति की जा रही है जबकि घाटे के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे आपूर्ति हो पा रही है।
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अपर मुख्य सचिव ऊर्जा व पावर कार्पोरेशन के अध्यक्ष अरविंद कुमार के मुताबिक पूर्वांचल वितरण निगम में सबसे ज्यादा घाटा है। घाटे की भरपाई के लिए राज्य सरकार हर साल अनुदान देती है। 2020-21 में इसके लिए 12922 करोड़ रुपये बजट प्रावधान किया गया है। इसी प्रकार बीते वर्षों में बिजली उत्पादकों से खरीदी गई बिजली के बकाये की भरपाई के लिए पीएफसी और आरईसी से 20940 करोड़ रुपये ऋण लिया गया है जिसकी अदायगी भी प्रदेश सरकार द्वारा की जाएगी।
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अरविंद कुमार ने बताया बिजली आपूर्ति के मुकाबले पर्याप्त राजस्व वसूली न हो पाने व लाइन हानियां ज्यादा होने से पूर्वांचल निगम में घाटा बढ़ रहा है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में इस निगम के अंतर्गत आने वाले शहरी क्षेत्र के उपभोक्ताओं में मात्र 61 प्रतिशत ने ही बिल जमा किया जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में मात्र 12.5 प्रतिशत ने ही अपना बिजली का बिल जमा किया है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश सरकार के प्रयासों से बिजली आपूर्ति में काफी सुधार हुआ है। सभी उपभोक्ताआें को पर्याप्त व निर्बाध बिजली मिले, इसके लिए कर्मचारियों को पूरी निष्ठा एवं ईमानदारी के साथ काम करते हुए अपने-अपने क्षेत्र की लाइन हानियां कम करके राजस्व बढ़ाना होगा।
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अपर मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश में बिजली उत्पादन क्षमता में 3973 मेगावाट की वृद्धि हुई है। इसी प्रकार ट्रांसमिशन क्षमता भी16348 मेगावाट से बढ़कर 24 हजार मेगावाट तक हो गई है। अधिकतम बिजली की मांग 24000 मेगावाट से ज्यादा हो गई है। शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे आपूर्ति की जा रही है जबकि घाटे के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे आपूर्ति हो पा रही है।