यूपी की राजनीति में अब पूर्वांचल का बोलबाला, आदित्यनाथ नौंवे सीएम
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महंत आदित्यनाथ पूर्वांचल से नौवें सीएम बने हैं। गोरखपुर से वह दूसरे मुख्यमंत्री हैं। लंबे समय बाद यह पहला मौका है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य पूर्वी यूपी की नुमाइंदगी करने वाले हैं। दूसरे उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा लखनऊ से हैं। प्रदेश की राजनीति में पूर्वांचल का बोलबाला हो गया है।
पूर्वांचल को 15 साल बाद कोई मुख्यमंत्री मिला है। इससे पहले राजनाथ सिंह अक्तूबर 2000 से मार्च 2003 तक मुख्यमंत्री थे। भाजपा के डिप्टी सीएम चुने गए केशव प्रसाद मौर्य भी पूर्वांचल (इलाहाबाद) से हैं, वह फूलपुर से सांसद हैं।
माना जा रहा है कि सीएम और एक डिप्टी सीएम पूर्वांचल से बनाकर भाजपा ने इस इलाके में अपनी पैठ और मजबूत करने की कोशिश की है।
अभी तक ये रही है पूर्वांचल में भाजपा की हालत
पूर्वांचल में विधानसभा चुनाव में भाजपा की सफलता की दर पश्चिमी यूपी, अवध और बुंदेलखंड से कम रही है। पहले चरण में भाजपा को जहां पश्चिमी यूपी की 73 में से 66 सीटें मिली, वहीं सातवें और आखिरी चरण में 40 में मात्र 25 सीट मिली हैं।
यानी पश्चिमी यूपी में भाजपा 90 फीसदी से ज्यादा अंकों से पास हुई तो पूर्वांचल में केवल 62 फीसदी सीटों पर कामयाबी मिली। अब पूर्वांचल से सीएम बन जाने से इस क्षेत्र में भाजपा को ज्यादा मजबूती मिलने की उम्मीद है।
एक दौर ऐसा था जब सूबे की सियासत में पूर्वांचल का डंका बजता था। पंडित जवाहर लाल नेहरू प्रधानमंत्री थे तो वाराणसी के डॉ. संपूर्णानंद सीएम होते थे। इंदिरा गांधी पीएम थीं तो वाराणसी के त्रिभुवन नारायण सिंह, कमलापति त्रिपाठी, विश्वनाथ प्रताप सिंह और श्रीपति मिश्र मुख्यमंत्री रहे।
केंद्र में जनता पार्टी की सरकार बनी तो आजमगढ़ के रामनरेश यादव यूपी के मुख्यमंत्री थे। राहुल गांधी के जमाने में वीर बहादुर सिंह सीएम थे। महंत आदित्यनाथ से पहले वह गोरखपुर से सीएम बनने वाले पहले नेता थे। पूर्वांचल से लाल बहादुर शास्त्री (वाराणसी) और चंद्रशेखर (बलिया) प्रधानमंत्री रह चुके हैं।