अतीत का झरोखा: अपना ही चुनाव हार गए पीएम पद के दावेदार एनडी तिवारी
राजनीति में किस्मत भी एक बड़ी भूमिका निभाती है। इस बात को एनडी तिवारी से बेहतर कौन समझ सकता है। जब उनकी जीत तय मानी जा रही थी तो वो हार गए और इसके साथ ही पीएम बनने का मौका भी चला गया।
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किस्मत जो न कराए। इस कहावत पर कोई यकीन करे या न करे लेकिन नारायण दत्त तिवारी ताउम्र किस्मत के खेल को नहीं भूल पाए। पेशे से शिक्षक अमित पुरी बताते हैं, 1991 में किस्मत ने एनडी तिवारी के साथ अजीबोगरीब खेल खेला। वे नैनीताल से लोकसभा का चुनाव लड़ रहे थे। उनके सामने भाजपा से थे युवा बलराज पासी।
तिवारी न सिर्फ वरिष्ठ थे, बल्कि इंदिरा परिवार के काफी नजदीकी भी माने जाते थे। राजीव गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस सरकार बनने पर उनका प्रधानमंत्री बनना तय माना जा रहा था। उनकी जीत पर भी किसी को कोई संदेह नहीं था। पर, मतपेटियां खुलीं तो अप्रत्याशित नतीजा आया।
तिवारी बलराज से 11 हजार वोटों से हार गए। तकदीर ने यहां एक खेल और खेला। बलराज पासी ने भले ही एनडी तिवारी जैसे सियासी धुरंधर को पटकनी देकर उनसे प्रधानमंत्री पद का मौका छीन लिया, लेकिन खुद भी उस चुनाव के बाद कोई चुनाव नहीं जीत पाए।
रामकोला का आंदोलन जिसने लिखा 1993 के चुनाव का भाग्य
बात 1992 की है। देवरिया के रामकोला के गन्ना किसान बकाया पैसा नहीं मिलने से परेशान थे। गुस्साए किसानों ने इसके विरोध में आंदोलन कर दिया। पुलिस ने आंदोलन कर रहे किसानों पर गोली चला दी, जिससे कुछ की मौत हो गई। कई घायल भी हुए।
23 सितंबर को मुलायम सिंह ने एलान किया कि अगर सरकार किसानों का हक नहीं देती है और दोषी अफसरों पर कार्रवाई नहीं करती है तो सत्याग्रह किया जाएगा। इससे परेशान भाजपा सरकार ने देवरिया में नेताओं के दौरे पर रोक लगा दी। मुलायम सिंह कुछ साथियों के साथ 7-8 अक्तूबर की दरमियानी रात देवरिया के लोकनिर्माण विभाग के डाक बंगले पहुंच गए।
आधी रात के बाद पुलिस ने भवन को चारों तरफ से घेर लिया और रात में ही सबको वाराणसी सेंट्रल जेल भेज दिया। आखिर सरकार ने 14 अक्तूबर को सभी को बिना शर्त रिहा कर दिया। बहरहाल साल विदा होने को आ गया। पर, विदा होते-होते भी यह साल 1993 में होने वाले विधानसभा के मध्यावधि चुनाव का भाग्य लिख रहा था।
4-5 नवंबर को मुलायम सिंह के नेतृत्व में लखनऊ के बेगम हजरतमहल पार्क में सम्मेलन हुआ। इसी सम्मेलन में समाजवादी पार्टी का जन्म हुआ। 1993 में बसपा के साथ गठबंधन करके मुलायम सिंह ने सरकार बनाई और दोबारा मुख्यमंत्री बने।