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सीएम योगी आदित्यनाथ के रामलला के दर्शन के क्या हैं मायने?

Wed, 31 May 2017 02:10 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Wed, 31 May 2017 02:10 PM IST
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political meaning of up cm adityanath yogi to visit ayodhya
सीएम आद‌ित्यनाथ योगी - फोटो : amar ujala
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बुधवार को अयोध्या यात्रा कई संदेश देगी। साथ ही सूबे की सियासत के भावी समीकरणों का भी संकेत देगी। यह यात्रा भले ही फैजाबाद मंडल की कानून-व्यवस्था व विकास कार्यों की समीक्षा और श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के जन्मोत्सव की वजह से तय हुई हो, लेकिन यह यात्रा यहीं तक सीमित नहीं रहने वाली।
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इसके राजनीतिक निहितार्थ भी निकाले जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि इसका संबंध भविष्य में योगी की चुनावी यात्रा से भी जुड़ा हो सकता है। योगी बुधवार सुबह करीब नौ बजे अयोध्या पहुंचेंगे। वे सबसे पहले हनुमान गढ़ी और फिर श्रीराम जन्मभूमि स्थल पर विराजमान रामलला के दर्शन करेंगे।
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दर्शन के बाद वे सरयू घाट पर सरयू नदी का पूजन करेंगे। फिर राम की पैड़ी देखने के बाद वे फैजाबाद पहुंचकर भाजपाइयों से मिलेंगे। साथ ही फैजाबाद मंडल की कानून-व्यवस्था व विकास कार्योँ की समीक्षा करेंगे।
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इसके बाद वे फिर अयोध्या लौटकर राममंदिर आंदोलन का केंद्र रहे दिगंबर अखाड़े के संत-महात्माओं से भेंट करेंगे। इस अखाड़े का महत्व इसलिए भी हैं क्योंकि यहीं पर मंदिर आंदोलन के नायक स्व. महंत रामचंद्र परमहंस रहा करते थे।

यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण

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सीएम आद‌ित्यनाथ योगी - फोटो : demo pic
मुख्यमंत्री के गुरु महंत अवैद्यनाथ भी जब अयोध्या आते थे तो यही स्थान उनका केंद्र हुआ करता था। दिगंबर अखाड़े के बाद वे श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के जन्मोत्सव समारोह में शामिल होंगे। भाजपा का कोई मुख्यमंत्री करीब 17 साल बाद अयोध्या में होगा।

अयोध्या की भूमिका भाजपा की ताकत बढ़ाने में महत्वपूर्ण रही है। इसीलिए भगवा टोली के नेताओं के यहां आने के खास अर्थ रहे हैं। सीएम योगी अभी सांसद हैं। मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के लिए उन्हें छह माह में विधानसभा या विधान परिषद में से किसी सदन का सदस्य बनना जरूरी है।

कुछ दिनों से सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज है कि समीकरण साधने और लोकसभा 2019 के मद्देनजर एजेंडे को धार देने के लिए गोरक्षपीठाधीश्वर योगी की नई कर्मभूमि अयोध्या भी हो सकती है। वे यहां से चुनाव लड़ सकते हैं। साथ ही अयोध्या पर आस्था और इसके महत्व का संदेश देने की कोशिश कर सकते हैं।
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