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चौधरियों की जंग
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 07 Jul 2014 10:07 AM IST
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सत्तारूढ़ दल में आजकल दो चौधरियों के बीच जंग छिड़ी है। दोनों एक ही जिले के हैं और मंत्री भी। दोनों के ही दिन कुछ ठीक नहीं चल रहे हैं।
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एक से पहले ही अहम विभाग छीन लिया गया था और दूसरे का मलाईदार विभाग चुनाव नतीजे आने के बाद छिना। अब ‘सरकार’ की गुडबुक में शामिल होने के लिए दोनों फिर जोर लगा रहे हैं।
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पार्टी फोरम से लेकर सदन के भीतर तक अपनी ‘विद्वता’ दिखाने में जुटे रहने वाले चौधरी ‘सरकार’ की चापलूसी का मौका नहीं छोड़ते। ‘सरकार’ को देखते ही उनका मन बोलने के लिए मचलने लगता है।
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सदन में कई बार उन्होंने इस मौके का फायदा भी उठाया लेकिन अभी तक ‘सरकार’ की तरफ से कोई खास भाव नहीं दिया गया। दूसरे चौधरी भी कहां पीछे रहने वाले। ‘विद्वान’ चौधरी बोलें और वह चुप बैठे रहें ऐसा हो ही नहीं सकता।
मौके-बेमौके वह भी खड़े होकर नसीहतें देकर यह साबित करने की कोशिश करते हैं कि विद्वता का ठेका एक ही चौधरी के नाम नहीं है। चौधरियों की इस जंग पर पार्टी के लोग यह कहते हुए चुटकी ले रहे हैं कि देखो कौन किस पर भारी पड़ता है।