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खास मकसद से यूपी में बनाए गए हैं सीएम के अलावा दो डिप्टी सीएम

Sun, 19 Mar 2017 08:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 19 Mar 2017 08:14 PM IST
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 political equation behind two deputy chief minister in Uttar Pradesh.
- फोटो : amar ujala

भाजपा ने सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए पहली बार मुख्यमंत्री महंत आदित्यनाथ के साथ दो डिप्टी सीएम बनाए हैं। नए राज के सियासी समीकरण में भाजपा ने ठाकुर, ब्राह्मण और बैकवर्ड को साधा है। इन्हीं के वोटों के भरोसे भाजपा ने इस चुनाव में तीन चौथाई से ज्यादा बहुमत हासिल किया है।

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भाजपा को इस बार सवर्ण वोटों के साथ ही गैर यादव पिछड़ों और गैर जाटव दलित वोटों का बड़ा हिस्सा मिला है। पिछड़ों, अति पिछड़ों की लामबंदी खासतौर से भाजपा के पक्ष में रही। भाजपा की चिंता 2019 तक इस समीकरण को बरकरार रखने की है।
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मनोनीत मुख्यमंत्री गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत आदित्यनाथ संन्यासी हैं। वह भाजपा में प्रखर हिंदुत्व का चेहरा हैं, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के मुद्दों पर बेबाकी से बोलते हैं। इस चुनाव में भी पश्चिमी यूपी से पूर्वांचल तक वे इन मुद्दों को गरमाते रहे।
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भाजपा ने प्रदेश में पहली बार किसी संन्यासी को सीएम का ताज सौंपकर जातीय जोड़तोड़ से ऊपर उठने की कोशिश की है। साफ है कि भाजपा ने हिंदुत्व के मुद्दों को तरजीह देने का संदेश दे दिया है।

इन्हें साधने के लिए आदित्यनाथ को बनाया सीएम

 political equation behind two deputy chief minister in Uttar Pradesh.

हालांकि, संन्यासी बनने से पहले आदित्यनाथ उत्तराखंड के राजपूत परिवार से थे, इस नाते उन पर अब भी ठाकुर होने का लेवल लगता रहता है।

उन्हें सीएम बनाने से हिंदुओं की अन्य जातियों के साथ राजपूत खास तौर पर सधते हैं। उनका पूर्वांचल में अच्छा जनाधार भी है। गोरक्षपीठ के अनुयायियों की संख्या भी ठीक-ठाक है।

केशव के जरिए अति पिछड़ों को साधा
प्रदेश में पिछड़ी जातियों की तादाद 54 फीसदी से ज्यादा है। भाजपा ने पिछले एक-डेढ़ साल में इन जातियों पर काफी काम किया है। अति पिछड़ी जातियां पहले बसपा या सपा के पक्ष में दिखाई पड़ती थीं। इन्हें अपने साथ जोड़ने के लिए भाजपा ने केशव प्रसाद मौर्य को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी। इसका नतीजा चुनाव में दिखाई दिया है।

भाजपा को पिछड़ों के साथ ही अति पिछड़ों के वोट काफी तादाद में मिले। इस पिछड़े वोट बैंक को सहेजे रखने के लिए केशव प्रसाद मौर्य को डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी दी गई है।

दिनेश शर्मा के जरिए ब्राह्मणों को संदेश

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दिनेश शर्मा - फोटो : amar ujala

विधानसभा चुनाव में इस बार पश्चिम से पूरब तक ब्राह्मण समाज का अधिकतर वोट भाजपा के पक्ष में गया है। भाजपा ने चुनाव में समर्थन के बदले ब्राह्मणों का ख्याल रखने का संदेश दिया है।

विधायक नहीं होने के बावजूद लखनऊ के मेयर दिनेश शर्मा को इसीलिए डिप्टी सीएम बनाया गया है। लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर दिनेश ब्राह्मणों में निर्विवाद और साफ-सुथरा छवि के हैं। इससे पहले उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और गुजरात का प्रभारी बनाया गया था।

कौन बनेगा प्रदेश अध्यक्ष
केशव प्रसाद मौर्य को उपमुख्यमंत्री बनाते ही अटकलें लगने लगी हैं कि उनकी जगह भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष की बागडोर किसे सौंपी जाएगी। पिछड़े वर्ग की कुर्मी बिरादरी से ताल्लुक रखने वाले स्वतंत्र देव सिंह मोदी-शाह के नजदीक माने जाते हैं।

एक बार तो उनका नाम भी मुख्यमंत्री के दावेदार के रूप में उभरा था। अब पार्टी संगठन में उनकी भूमिका रहेगी या सरकार में, इस पर भी सबकी नजर है। एक भाजपा नेता के मुताबिक मंत्री न बनने पर स्वतंत्र देव को प्रदेश भाजपा की बागडोर सौंपी जा सकती है।

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