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औद्योगिक पार्क की स्थापना को प्रोत्साहन के लिए नीति में होगा बदलाव
Sat, 28 Nov 2020 02:33 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Sat, 28 Nov 2020 02:33 AM IST
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प्रदेश सरकार औद्योगिक पार्कों की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए से नीति में कई महत्वपूर्ण बदलाव पर विचार कर रही है। इसके अंतर्गत स्पेशल परपज व्हीकल (एसपीवी) के गठन की प्रक्रिया में संशोधन व आवेदक कंपनी के लिए न्यूनतम नेटवर्थ के निर्धारण का फॉर्मूला तय करने की योजना है।
सरकार ने निजी औद्योगिक पार्कों की स्थापना की नीति बनाई है। इसके अंतर्गत व्यवस्था है कि विकासकर्ता को कोई भी इंसेंटिव (स्टांप ड्यूटी में छूट को छोड़कर) तभी दिए जाएंगे जबकि उसके द्वारा निवेश को पूर्ण कर परियोजना को संचालित कर लिया गया हो। निवेशकों का तर्क है कि जिनके पास पहले से ही भूमि उपलब्ध है, वे परियोजनाएं तेजी से पूरी हो सकती हैं। इसलिए ऐसे प्रस्तावों को भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए जिनके पास पहले से ही भूमि उपलब्ध है।
दूसरा, नीति में नेटवर्थ व टर्नओवर की आवश्यकता इस उद्देश्य के साथ रखी गई थी कि जिस प्रस्तावक को शासन द्वारा लेटर आफ कंफर्ट (एलओसी) जारी किया जा रहा है, उसके प्रस्तावक के पास वित्तीय क्षमता हो। इसे स्पष्ट किए जाने की जरूरत है। तीसरा, स्पेशल परपज व्हीकल की अपनी कोई नेटवर्थ नहीं होती है। ऐसे में एसपीवी गठन की प्रक्रिया को युक्तिसंगत बनाया जाए।
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शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त आलोक टंडन की अध्यक्षता में बैठक कर इन बिंदुओं पर चर्चा के बाद निर्णय हो गया है। समाधान के विकल्प को नीति में शामिल करने की कार्यवाही तय की जाएगी।
नीति में ये प्रावधान होंगे शामिल
पहला, आवेदक के लिए न्यूनतम नेटवर्थ डीपीआर में आकलित प्रोजेक्ट कॉस्ट की 25% होनी चाहिए। साथ ही पिछले 3 वर्षों में न्यूनतम वार्षिक औसत टर्नओवर आकलित परियोजना लागत के समान होनी चाहिए। लेकिन, यदि निजी विकासकर्ता के पास परियोजना के लिए न्यूनतम क्षेत्रफल के समतुल्य भूमि उपलब्ध है तो नेटवर्थ व टर्नओवर के निर्धारित न्यूनतम मानक की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि यह शर्त रहेगी कि नीति लागू होने की तिथि से पहले विकासकर्ता के पास उपलब्ध भूमि के मूल्य को नीति के अंतर्गत वित्तीय प्रोत्साहन की गणना के लिए शामिल नहीं किया जाएगा।
नवगठित एसपीवी की स्थिति में नेटवर्थ तथा टर्नओवर की शर्तों को एसपीवी की पैरेंट कंपनी द्वारा पूरा किया जा सकेगा।
यदि प्रस्तावक कंपनी/भागीदारी/एसपीवी के उद्देश्यों में विधिवत संशोधन कर औद्योगिक पार्क/स्थान की स्थापना के उद्देश्य को शामिल कर लिया गया है तो ऐसी कंपनी/भागीदारी/एसपीवी को नीति के अंतर्गत पात्र माना जाएगा।
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सरकार ने निजी औद्योगिक पार्कों की स्थापना की नीति बनाई है। इसके अंतर्गत व्यवस्था है कि विकासकर्ता को कोई भी इंसेंटिव (स्टांप ड्यूटी में छूट को छोड़कर) तभी दिए जाएंगे जबकि उसके द्वारा निवेश को पूर्ण कर परियोजना को संचालित कर लिया गया हो। निवेशकों का तर्क है कि जिनके पास पहले से ही भूमि उपलब्ध है, वे परियोजनाएं तेजी से पूरी हो सकती हैं। इसलिए ऐसे प्रस्तावों को भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए जिनके पास पहले से ही भूमि उपलब्ध है।
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दूसरा, नीति में नेटवर्थ व टर्नओवर की आवश्यकता इस उद्देश्य के साथ रखी गई थी कि जिस प्रस्तावक को शासन द्वारा लेटर आफ कंफर्ट (एलओसी) जारी किया जा रहा है, उसके प्रस्तावक के पास वित्तीय क्षमता हो। इसे स्पष्ट किए जाने की जरूरत है। तीसरा, स्पेशल परपज व्हीकल की अपनी कोई नेटवर्थ नहीं होती है। ऐसे में एसपीवी गठन की प्रक्रिया को युक्तिसंगत बनाया जाए।
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शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त आलोक टंडन की अध्यक्षता में बैठक कर इन बिंदुओं पर चर्चा के बाद निर्णय हो गया है। समाधान के विकल्प को नीति में शामिल करने की कार्यवाही तय की जाएगी।
नीति में ये प्रावधान होंगे शामिल
पहला, आवेदक के लिए न्यूनतम नेटवर्थ डीपीआर में आकलित प्रोजेक्ट कॉस्ट की 25% होनी चाहिए। साथ ही पिछले 3 वर्षों में न्यूनतम वार्षिक औसत टर्नओवर आकलित परियोजना लागत के समान होनी चाहिए। लेकिन, यदि निजी विकासकर्ता के पास परियोजना के लिए न्यूनतम क्षेत्रफल के समतुल्य भूमि उपलब्ध है तो नेटवर्थ व टर्नओवर के निर्धारित न्यूनतम मानक की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि यह शर्त रहेगी कि नीति लागू होने की तिथि से पहले विकासकर्ता के पास उपलब्ध भूमि के मूल्य को नीति के अंतर्गत वित्तीय प्रोत्साहन की गणना के लिए शामिल नहीं किया जाएगा।
नवगठित एसपीवी की स्थिति में नेटवर्थ तथा टर्नओवर की शर्तों को एसपीवी की पैरेंट कंपनी द्वारा पूरा किया जा सकेगा।
यदि प्रस्तावक कंपनी/भागीदारी/एसपीवी के उद्देश्यों में विधिवत संशोधन कर औद्योगिक पार्क/स्थान की स्थापना के उद्देश्य को शामिल कर लिया गया है तो ऐसी कंपनी/भागीदारी/एसपीवी को नीति के अंतर्गत पात्र माना जाएगा।