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Lucknow News: ठगी की शिकार बुजुर्ग को पुलिस ने 43.14 लाख लौटाए
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लखनऊ। सेवानिवृत्त सरकारी डॉक्टर को डिजिटल अरेस्ट कर शातिरों ने 1.55 करोड़ रुपये ठगे थे। अब 110 दिनों बाद साइबर क्राइम थाने की पुलिस को उनके 43.14 लाख रुपये लौटाने में कामयाबी मिली है।
साइबर ठगों ने 13 अप्रैल को हजरतगंज के शाहनजफ इमामबाड़ा परिसर में रहने वालीं जिया सुल्ताना को कॉल किया था। खुद को एटीएस का अधिकारी बताकर उनके मोबाइल नंबर का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों में होने की बात कही। डॉक्टर जिया को 18 अप्रैल तक डिजिटल अरेस्ट कर शातिरों ने जांच के बहाने उनसे 1.55 करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए।
फर्जी गेमिंग एप में खातों का हुआ था इस्तेमाल
साइबर क्राइम थाने के प्रभारी इंस्पेक्टर आलोक राव ने बताया कि आरोपियों ने पहले पीड़िता से केरल, कर्नाटक, गौतमबुद्धनगर और महाराष्ट्र स्थित चार बैंकों के खाते में रकम ट्रांसफर कराई। इसके बाद पूरी रकम गुरुग्राम स्थित इंडसइंड बैंक के खाते में ट्रांसफर की। फिर वहां से भी रकम निकालकर 300 खातों में ट्रांसफर की गई। विवेचना में सामने आया कि इन खातों का इस्तेमाल फर्जी गेमिंग एप और वेबसाइट के पेआउट सेटलमेंट के लिए होता था।
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खातों के जरिये आरोपियों तक पहुंच रही पुलिस
इंस्पेक्टर ने बताया कि ठगी का अहसास होने पर पीड़िता ने 18 अप्रैल को शिकायत की। इस पर तुरंत 43.14 लाख रुपये फ्रीज करा दिए गए। औपचारिकता पूरी करने में 110 दिन का समय लग गया। इसके बाद रकम पीड़िता को लौटा दी गई। बाकी रकम की रिकवरी के लिए मोबाइल नंबरों और बैंक खातों को ट्रेस कर पुलिस आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। जल्द उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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साइबर ठगों ने 13 अप्रैल को हजरतगंज के शाहनजफ इमामबाड़ा परिसर में रहने वालीं जिया सुल्ताना को कॉल किया था। खुद को एटीएस का अधिकारी बताकर उनके मोबाइल नंबर का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों में होने की बात कही। डॉक्टर जिया को 18 अप्रैल तक डिजिटल अरेस्ट कर शातिरों ने जांच के बहाने उनसे 1.55 करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए।
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फर्जी गेमिंग एप में खातों का हुआ था इस्तेमाल
साइबर क्राइम थाने के प्रभारी इंस्पेक्टर आलोक राव ने बताया कि आरोपियों ने पहले पीड़िता से केरल, कर्नाटक, गौतमबुद्धनगर और महाराष्ट्र स्थित चार बैंकों के खाते में रकम ट्रांसफर कराई। इसके बाद पूरी रकम गुरुग्राम स्थित इंडसइंड बैंक के खाते में ट्रांसफर की। फिर वहां से भी रकम निकालकर 300 खातों में ट्रांसफर की गई। विवेचना में सामने आया कि इन खातों का इस्तेमाल फर्जी गेमिंग एप और वेबसाइट के पेआउट सेटलमेंट के लिए होता था।
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खातों के जरिये आरोपियों तक पहुंच रही पुलिस
इंस्पेक्टर ने बताया कि ठगी का अहसास होने पर पीड़िता ने 18 अप्रैल को शिकायत की। इस पर तुरंत 43.14 लाख रुपये फ्रीज करा दिए गए। औपचारिकता पूरी करने में 110 दिन का समय लग गया। इसके बाद रकम पीड़िता को लौटा दी गई। बाकी रकम की रिकवरी के लिए मोबाइल नंबरों और बैंक खातों को ट्रेस कर पुलिस आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। जल्द उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।