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पुलिस ने रातोंरात हटवा दिए समाजवादी पार्टी के नेता द्वारा लगवाए गए विवादित पोस्टर
Fri, 13 Mar 2020 09:09 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Fri, 13 Mar 2020 09:09 PM IST
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विवादित पोस्टर हटाते पुलिसकर्मी।
- फोटो : amar ujala
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नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में उपद्रव फैलाने वालों के पोस्टर के बगल में सपा नेता आईपी सिंह ने लखनऊ के गोमतीनगर के लोहियापार्क चौराहे पर गुरुवार देर रात विवादित पोस्टर लगवा दिया। सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत पहुंची और आनन-फानन में पोस्टर हटवा दिया।
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वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सड़कों के किनारे उपद्रवियों के पोस्टर फौरन हटाने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार भी कर दिया। जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ ने साफ तौर पर कहा, बेशक दंगाइयों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और उन्हें दंडित भी किया जाना चाहिए। मगर, ऐसा कोई कानून नहीं है, जो सड़क के किनारे उपद्रवियों के पोस्टर लगाने को सही ठहरा सके।
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अवकाशकालीन पीठ ने इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री को इस मामले को तत्काल मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे के सामने रखने को कहा, ताकि कम से कम तीन सदस्यीय पीठ का गठन किया जा सके, जो अगले हफ्ते इस मामले को सुन सके। यूपी सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने इस विवाद को गंभीर मानते हुए कहा कि इस मसले पर बड़ी पीठ द्वारा परीक्षण करने की दरकार है। मामले में अपेक्षाकृत विस्तृत व्याख्या और विचार की जरूरत भी बताई। यूपी सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, यह मामला बेहद महत्वपूर्ण है।
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इस पर पीठ ने मेहता से पूछा कि क्या राज्य सरकार के पास पोस्टर लगाने की ऐसी कोई शक्ति है? जस्टिस ललित की पीठ ने कहा, हिंसा और तोड़फोड़ की निंदा हो, मगर क्या अपराधियों को बार-बार पीड़ित किया जाना चाहिए? आरोपियों के लिए भुगतान करने का समय अभी भी बाकी था और वसूली की कार्रवाई को चुनौती देने वाली उनकी याचिकाएं लंबित हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने जिन लोगों की तस्वीरें बैनरों पर हैं, उन्हें मामले में पक्षकार बनने की मंजूरी भी दे दी।