पुलिस भर्ती अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज, पुलिस ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा, 12 जख्मी
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नियुक्ति व प्रशिक्षण पर भेजे जाने की मांग को लेकर विधान भवन के घेराव की तैयारी कर रहे पुलिस भर्ती अभ्यर्थियों पर शनिवार दोपहर हजरतगंज पुलिस ने कहर बरपाया। लक्ष्मण मेला मैदान स्थित धरना स्थल पर लगा आंदोलनकारियों का तंबू उखाड़ दिया। विरोध करने पर अभ्यर्थियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। महिला अभ्यर्थियों को भी नहीं बख्शा।
पुलिस की बर्बरता से बचने के लिए कई अभ्यर्थी गोमती नदी में कूद गए। इनमें से कई को तैरना भी नहीं आता था। उन्हें छलांग लगाते देख महिला अभ्यर्थी व साथी चीखने लगे। इससे पुलिसकर्मियों के भी होश उड़ गए और अभ्यर्थियों को किसी तरह पानी से बाहर निकलवाया।
लाठीचार्ज में घायल 12 अभ्यर्थियों को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि महिला अभ्यर्थियों को मोहनलालगंज कोतवाली व 30 पुरुष अभ्यर्थियों को हजरतगंज कोतवाली ले आया गया। शाम को सभी को निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया।
चार अप्रैल से धरना दे रहे हैं प्रदेशभर के अभ्यर्थी
वर्ष 2013 की पुलिस भर्ती में प्रदेश के विभिन्न जिलों से 16,747 अभ्यर्थी चुने गए थे, लेकिन न तो उनकी नियुक्ति हो सकी है न ही उन्हें प्रशिक्षण पर भेजा गया। बीती चार अप्रैल को उन्होंने लक्ष्मण मेला मैदान में धरना शुरू किया था।
इससे पहले भी कुछ अभ्यर्थियों ने गांधी प्रतिमा पर कई दिन तक धरना-प्रदर्शन और आमरण अनशन किया था। मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद सभी घर लौट गए थे।
सीएम ने 28 से प्रशिक्षण का दिया था आश्वासन
अभ्यर्थियों का कहना है कि पिछली बार राजधानी में आंदोलन के दौरान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उन्हें 28 मार्च से प्रशिक्षण पर भेजने का आश्वासन दिया था, लेकिन जिलों में तैनात पुलिस अधिकारियों ने इसमें अड़ंगा लगा दिया।
अभ्यर्थियों ने भर्ती बोर्ड के डीजी और डीजीपी से संपर्क किया तो वे भी जल्द प्रशिक्षण पर भेजने का भरोसा दिलाते रहे। मुख्यमंत्री की ओर से दी गई तारीख बीत जाने के बाद अभ्यर्थियों का हौसला जवाब दे गया और वे फिर से धरने पर बैठ गए।
सीएम से मिलने जा रहे थे, पुलिस ने रोका
अभ्यर्थी शनिवार सुबह जुलूस के रूप में मुख्यमंत्री से मिलने जा रहे थे। हजरतगंज पुलिस ने सिकंदरबाग चौराहा पर उन्हें रोक लिया।
यहां अभ्यर्थियों से बातचीत के बाद पुलिस पांच लोगों के प्रतिनिधिमंडल को लेकर मुख्यमंत्री आवास रवाना हो गई जबकि बाकी को वापस धरनास्थल भेज दिया गया। हालांकि काफी देर इंतजार के बाद भी मुख्यमंत्री से अभ्यर्थियों की मुलाकात नहीं हो सकी।
विधान भवन घेरने की तैयारी की हो गई मुखबिरी
पुलिस सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री आवास से लौटने के बाद अभ्यर्थी धरनास्थल पर बैठक कर गुपचुप तरीके से विधान भवन घेरने की रणनीति बना रहे थे। उनकी बैठक में सादे कपड़ों में एक महिला पुलिसकर्मी भी थी।
उसने यह सूचना अधिकारियों को दी जिसके बाद अभ्यर्थियों का तंबू उखाड़ा गया। विरोध करने पर कई थानों की पुलिस और पीएसी बुलवाकर लाठीचार्ज कर दिया गया जिससे भगदड़ मच गई।
नदी से निकालकर उधेड़ दी चमड़ी
पुलिस ने नदी से निकलकर भाग रहे प्रदीप को लक्ष्मण मेला मैदान में घेरकर पकड़ लिया। उसे इतनी बेरहमी से पीटा कि खाल उधड़ गई।
प्रदीप को बचाने के लिए साथी दौड़े तो पुलिसकर्मियों ने उनकी भी पिटाई कर दी। अभ्यर्थी हाथ जोड़कर छोड़ने की गुजारिश करते रहे मगर लाठियां नहीं थमीं।
अभ्यर्थियों ने फेंकी कीचड़ तो पुलिस ने घेरकर पीटा
साथियों के गोमती में कूदने के बाद आक्रोशित अभ्यर्थियों ने विरोध जताते हुए पुलिस पर कीचड़ फेंकी। इससे नाराज पुलिसकर्मी उनके बाहर निकलने का इंतजार करते रहे। बाहर आते ही पुलिस ने उन्हें चौतरफा घेरकर पीटा।
इन्होंने गोमती में लगाई थी छलांग
फूलचंद्र, शुभम, अनिल, राजू श्रीवास्तव, ललित भारती समेत दस अभ्यर्थी।
पुलिस ने इन्हें दबोचा
मनीष, अंकुर, अमित, महेंद्र पाल, हरपाल, नीलू, कैलाश यादव, दीपक, नकुल सोनकर, अरुण कुमार समेत 30 अभ्यर्थी।
ये अस्पताल में भर्ती
कंचन, सीमा, दीप्ति, नीलम, संजेष, संजय समेत एक दर्जन अभ्यर्थी लाठीचार्ज में जख्मी हो गए। सभी सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती हैं।