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...तो पुलिस को ही नहीं पता कैसे हुई हत्या
विष्णु मोहन/अमरउजाला, लखनऊ
Updated Thu, 23 Jan 2014 08:29 AM IST
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झांसी हत्याकांड के चार दिन बाद भी पुलिस या एसटीएफ अभी तय नहीं कर सकी है कि हत्या में कौन सा असलहा प्रयोग किया गया।
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देशी तमंचे का इस्तेमाल हुआ या फैक्ट्रीमेड हथियार का। इसका महत्व इसलिए है क्योंकि जिस तरह ताबड़तोड़ गोलियां चलीं वह फैक्ट्रीमेड या अर्द्ध स्वचालित हथियारों से ही चलाई जा सकती हैं, देसी तमंचे व कट्टे से नहीं।
पुलिस ने दावा किया है कि मौके से .315 व .12 बोर की गोलियों के खोखे बरामद हुए। इस बोर के अर्द्ध स्वचालित हथियार नहीं होते बल्कि इन बोर के फैक्ट्रीमेड असलहे होते हैं।
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असलहों की जानकारी करने के लिए पुलिस ने बरामद खोखों को बैलेस्टिक जांच के लिए भेजा है और आला अफसरों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट तलब की है।
पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों से भी पूछा जाएगा कि गोली कितनी दूरी से मारी गई। झांसी की पुलिस कप्तान श्रीपर्णा गांगुली ने कहा कि वारदात हत्या के लिए की गई। कार पर गोलियां नहीं लगी हैं।
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हत्यारों ने कार में बैठे लोगों को ही निशाना बनाया। मौके से आठ से अधिक खोखे बरामद हुए हैं। ऐसे में देसी तमंचों या कट्टे से गोलियां चलाया जाना संभव नहीं लग रहा।
देसी असलहों से एक बार में एक ही गोली चलाई जा सकती है और दोबारा लोड करने में समय लगता है जबकि फैक्ट्रीमेड असलहों में इतना समय नहीं लगता। बहरहाल, पुलिस अभी इस मामले में कोई उल्लेखनीय प्रगति हासिल नहीं कर सकी है।
एसटीएफ की पड़ताल भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। डीजीपी मुख्यालय से बुधवार को झांसी के पुलिस और एसटीएफ के अफसरों से केस में हो रही प्रगति के बारे में बार-बार पूछा जाता रहा।