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फर्जी कागजातों से वाहन फाइनेंस कराकर बेचने वाला ठग दबोचा

Mon, 07 Dec 2020 02:02 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 07 Dec 2020 02:02 AM IST
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police caught a man in fraud
गाजीपुर पुलिस ने फर्जी कागजात से वाहन फाइनेंस कराकर बेचने वाले देवरिया के शातिर धर्मेंद्र कुमार को गिरफ्तार कर लिया। एडीसीपी उत्तरी राजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि धर्मेंद्र के साथ इस धंधे में उसका भतीजा जितेंद्र पासवान और एक रिश्तेदार दुर्गेश भी शामिल है। उसकी निशानदेही पर सात लग्जरी कारें बरामद हुई हैं। जितेंद्र और दुर्गेश की तलाश में पुलिस टीमें लगाई गई हैं।
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एडीसीपी उत्तरी ने बताया कि धर्मेंद्र देवरिया के बैतालपुर का रहने वाला है और पूर्व प्रधान भी है। वह देवरिया में ही रुद्राक्ष इंटरप्राइजेज के नाम से कंपनी खोलकर वाहनों की खरीद-फरोख्त का धंधा कर रहा था। शनिवार को गाजीपुर इलाके में वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस ने उसे महाराष्ट्र के पंजीकरण की कार समेत रोककर कागज मांगे जिन्हें वह नहीं दिखा सका। उसे थाने लाकर पूछताछ की गई तो पूरा खेल सामने आया।
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धर्मेंद्र ने बताया कि उसके रिश्तेदार दुर्गेश और जितेंद्र गुजरात के सूरत में रहते हैं। दोनों की मदद से वह फर्जी नाम-पते से गुजरात और महाराष्ट्र के अलग-अलग बैंकों व निजी फाइनेंस कंपनियों से लग्जरी कारें फाइनेंस कराता था। वाहनों का रजिस्ट्रेशन कराने के बाद शातिर ठग उनके फाइनेंस होने की जानकारी ऑनलाइन हटवा देते थे। इसके बाद कारें बेच दी जाती थीं। ग्राहक जब कार के पंजीकरण नंबर को ऑनलाइन चेक करते थे तो फाइनेंस के बारे में पता नहीं चल पाता था। ठग गाड़ियों के फर्जी कागजात भी बनवा देते थे।
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एडीसीपी ने बताया कि धर्मेंद्र की निशानदेही पर सात कारें बरामद कर ली गई हैं। जितेंद्र एक कार लेकर भागा हुआ है जबकि दुर्गेश गुजरात में है। उसे पकड़ने के लिए पुलिस टीम जल्द गुजरात भेजी जाएगी। ठग को पकड़ने वाली टीम में क्राइम टीम प्रभारी व पॉलीटेक्निक चौकी के प्रभारी विजय शंकर सिंह, लेखराज चौकी प्रभारी जितेंद्र चौहान, एचएएल चौकी प्रभारी ज्ञानेंद्र त्रिपाठी, उपनिरीक्षक सुधीर यादव, मुख्य आरक्षी नागेंद्र सिंह, आरक्षी ऋषि तिवारी, राहुल सिंह व राजकुमार सिंह शामिल थे।
निर्माणाधीन मकान दिखाकर पास कराते थे लोन
एडीसीपी ने बताया कि ठग लोन लेने के लिए गुजरात और महाराष्ट्र में निर्माणाधीन मकानों को जरिया बनाते थे। उक्त मकान के पते पर फर्जी नाम से कागजात बनवाकर लोन के लिए आवेदन करते थे। बैंक या निजी फाइनेंस कंपनियों के सर्वेयर जब उक्त पते पर पहुंचते तो ठग वहां मिल जाते और मकान बनवाने की बात कहते जिससे सर्वेयर पॉजिटिव रिपोर्ट लगा देता। इसके बाद ठगों का वाहन लोन पास हो जाता था।

बैंक, फाइनेंस कंपनी व आरटीओ के कर्मचारी भी ठगी में शामिल
एडीसीपी का कहना है कि ठगी के इस धंधे में बैंक, निजी फाइनेंस कंपनी और आरटीओ के कर्मचारी भी शामिल हैं। उनकी मिलीभगत के बगैर ठगी संभव नहीं है। इस बारे में भी पड़ताल की जा रही है।
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