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मन की बात में पीएम मोदी ने लखनऊ के वैज्ञानिकों की तारीफ की, लेमनग्रास खेती को सराहा
Mon, 27 Jul 2020 05:14 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 27 Jul 2020 05:14 PM IST
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नरेंद्र मोदी
- फोटो : Twitter
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मन की बात में रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लखनऊ के वैज्ञानिकों की तारीफ की। सीमैप के ये वैज्ञानिक झारखंड के पिछड़े और आदिवासी इलाकों में जाकर ग्रामीणों को खेती की आधुनिक तकनीकें सिखा रहे हैं। जिससे पारंपरिक फसलों तक सीमित रहने वाले किसान लेमन ग्रास जैसी कैश क्रॉप की खेती कर अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बिशुनपुर में करीब 30 महिला समूह इसकी खेती कर रहे हैं। यहां लेमनग्रास उगाया जाता है। इसके तेल की बाजार में काफी मांग है। इस तेल से उनको अच्छी आय हो रही है। यह फसल केवल चार महीने में तैयार हो जाती है। इससे लोगों की जिंदगी खुशहाल हो पा रही है।
वहीं सीमैप के निदेशक डॉ. प्रबोध त्रिवेदी ने बताया कि एरोमा मिशन में हमारे वैज्ञानिक झारखंड के बिशुनपुर सहित दूसरे इलाकों में जाते हैं। वहां उन्नत प्रजाति की लेमनग्रास और दूसरी सगंध फसलों की पौध उपलब्ध कराई जाती है। केवल अच्छी प्रजाति देना ही हमारा काम नहीं है। हमारी टीम उनके बीच रहकर जरूरी तकनीकी सहयोग भी देती है।
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प्रधानमंत्री ने कहा कि बिशुनपुर में करीब 30 महिला समूह इसकी खेती कर रहे हैं। यहां लेमनग्रास उगाया जाता है। इसके तेल की बाजार में काफी मांग है। इस तेल से उनको अच्छी आय हो रही है। यह फसल केवल चार महीने में तैयार हो जाती है। इससे लोगों की जिंदगी खुशहाल हो पा रही है।
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वहीं सीमैप के निदेशक डॉ. प्रबोध त्रिवेदी ने बताया कि एरोमा मिशन में हमारे वैज्ञानिक झारखंड के बिशुनपुर सहित दूसरे इलाकों में जाते हैं। वहां उन्नत प्रजाति की लेमनग्रास और दूसरी सगंध फसलों की पौध उपलब्ध कराई जाती है। केवल अच्छी प्रजाति देना ही हमारा काम नहीं है। हमारी टीम उनके बीच रहकर जरूरी तकनीकी सहयोग भी देती है।
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तीन साल से चल रहा प्रयास
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
इसका फायदा यह होता है कि लेमनग्रास से अधिकतम तेल मिल पाता है। डिस्टिलेशन यूनिट भी सीमैप की तकनीकी टीम विकसित करती है। इसके लिए झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के साथ संयुक्त रूप से काम किया जा रहा है। प्रो. त्रिवेदी का कहना है कि हमें खुशी है कि प्रधानमंत्री ने सीमैप के वैज्ञानिकों के काम को सराहा।
सीमैप झारखंड में पिछले तीन साल से काम कर रहा है। इनके प्रयासों से यहां किसानों की आय बढ़ाने में काफी मदद मिली। यह पूरी कवायद एरोमा मिशन में की जा रही है। सीमैप के पास इस समय लेमनग्रास की आठ प्रजातियां हैं।
सीमैप झारखंड में पिछले तीन साल से काम कर रहा है। इनके प्रयासों से यहां किसानों की आय बढ़ाने में काफी मदद मिली। यह पूरी कवायद एरोमा मिशन में की जा रही है। सीमैप के पास इस समय लेमनग्रास की आठ प्रजातियां हैं।