{"_id":"e3e86e8662720db84ae461eb4a6bc0c3","slug":"play-at-bali-preksha-grih-by-shalom-academy","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रेक्षागृह के मंच पर साकार हुए नौ रस ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रेक्षागृह के मंच पर साकार हुए नौ रस
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Tue, 17 Sep 2013 09:44 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्रीकृष्ण की हर लीला किसी न किसी रस से लबरेज हैं। पूतना वध व कालिया
विज्ञापन
मर्दन में जहां वीररस नजर आता है, वहीं रास के दौरान शृंगार रस बरसता है।
गोवर्धन पर्वत को उंगली पर उठाना अद्भुत रस से भरा है तो सत्यभामा द्वारा कृष्ण, नारद को बेचने फिर वापस हासिल करने में भक्तिरस दिखता है।
इन्हीं रसों का स्वाद दर्शकों ने सोमवार को राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में शालोम एकेडमी ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स की ओर से आयोजित नृत्यनाटिका ‘रसावतार’ में चखा।
निर्देशन वंदना तिवारी का रहा। उन्होंने बताया कि भावों की उत्पत्ति नौ रसों से होती है, जो जीवन के अभिन्न अंग हैं। इन्हीं रसों की प्रस्तुति कृष्ण को पात्र बनाकर की गई है।
नृत्यनाटिका में आशुतोष विश्वकर्मा, सुनीता चौहान, वर्षा वर्मा, अंकिता सिंह, रीना श्रीवास्तव, सुनीता तिवारी, आयुषि जायसवाल, आफरीन, इरा आर्या, निधि दुबे, प्रशांत सिंह, रवि गुप्त, अखिल तिवारी, आदर्श सिंह विसेन, अभिषेक सिंह, हेमंत कुमार ने प्रस्तुतियां दीं।
गोवर्धन पर्वत को उंगली पर उठाना अद्भुत रस से भरा है तो सत्यभामा द्वारा कृष्ण, नारद को बेचने फिर वापस हासिल करने में भक्तिरस दिखता है।
इन्हीं रसों का स्वाद दर्शकों ने सोमवार को राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में शालोम एकेडमी ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स की ओर से आयोजित नृत्यनाटिका ‘रसावतार’ में चखा।
निर्देशन वंदना तिवारी का रहा। उन्होंने बताया कि भावों की उत्पत्ति नौ रसों से होती है, जो जीवन के अभिन्न अंग हैं। इन्हीं रसों की प्रस्तुति कृष्ण को पात्र बनाकर की गई है।
नृत्यनाटिका में आशुतोष विश्वकर्मा, सुनीता चौहान, वर्षा वर्मा, अंकिता सिंह, रीना श्रीवास्तव, सुनीता तिवारी, आयुषि जायसवाल, आफरीन, इरा आर्या, निधि दुबे, प्रशांत सिंह, रवि गुप्त, अखिल तिवारी, आदर्श सिंह विसेन, अभिषेक सिंह, हेमंत कुमार ने प्रस्तुतियां दीं।