चार महीने बाद सुधार देंगे यूपी की खनन व्यवस्था: पीयूष गोयल
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केंद्रीय ऊर्जा, कोयला एवं खनन राज्यमंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि चार महीने बाद यूपी की खनन व्यवस्था को सुधार देंगे। उनका इशारा चार महीने बाद प्रदेश में भाजपा के सत्ता संभाल लेने की ओर था।
उन्होंने कहा कि खनन निगरानी प्रणाली (एमएसएस) से अवैध खनन पर काबू पाया जा सकता है। नवंबर अंत तक हरियाणा, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में लघु खनन के क्षेत्र में भी इसे लागू कर देंगे। बाकी राज्यों में दिसंबर अंत तक एमएसएस लागू करने की योजना है।
गोयल ने शनिवार को दिल्ली के एक होटल में एमएसएस लॉन्च किया। इस मौके पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लखनऊ समेत 11 राज्यों के संवाददाताओं से मुखातिब गोयल ने बताया कि एमएसएस में सैटेलाइट से खनन क्षेत्र पर नजर रखी जाएगी।
इससे खनन क्षेत्र के 500 मीटर दायरे में होने वाली घटनाओं की स्थिति चित्र के माध्यम से मिलती रहेगी। लघु खनन के मामले में राज्यों की सहमति से ही इस प्रणाली को लागू किया जा सकेगा। इसलिए राज्यों से ज्यादा से ज्यादा सहयोग की अपील है।
राज्य की ओर से दिया जाएगा हर तरह का सहयोग
इस पर यूपी के विशेष सचिव (खनन) संतोष कुमार ने मंत्री को बताया कि राज्य सरकार एमएसएस अपनाने के लिए तैयार है। इसके लिए राज्य की ओर से मंत्रालय को हरसंभव सहयोग दिया जाएगा।
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से खनन संबंधी एनओसी देर से मिलने संबंधी सवाल पर उन्होंने कहा, मैं भी इसका पक्षधर हूं कि पर्यावरण संबंधी एनओसी पूरी छानबीन के बाद ही जारी की जाए। हालांकि, अनावश्यक देरी के मामलों को देखा भी जा सकता है।
यूपी में खनन के बाद उस क्षेत्र को वैसा ही छोड़ देने संबंधी सवाल पर उन्होंने कहा कि इस मामले में उचित कदम उठाने का अधिकार राज्य सरकार का है। इसके बाद चुनाव की तरफ इशारा करते हुए कहा कि चार महीने बाद यूपी में खनन क्षेत्र में बड़े बदलाव ले आएंगे।
उपग्रह खुद ही भेजने लगता है अवैध खनन के संकेत
एमएसएस एक उपग्रह आधारित निगरानी प्रणाली है, जिसका मकसद जनता की भागीदारी के माध्यम से स्वचालित रिमोट सेंसिंग खोज प्रौद्योगिकी के उपयोग से अवैध खनन गतिविधियों का पता लगाकर उन्हें रोकना है।
इसमें स्वचालित सॉफ्टवेयर इमेज प्रोसेसिंग प्रौद्योगिकी अनधिकृत गतिविधियों पर खुद ही संकेत भेजने शुरू कर देती है। इन संकेतों का आईबीएम के एक रिमोट सेंसिंग नियंत्रण केंद्र में अध्ययन किया जाएगा और उसके बाद सत्यापन के लिए उस क्षेत्र के जिला स्तर के खनन अधिकारियों को भेज दिया जाएगा।
आम लोग भी दे सकेंगे अवैध खनन की सूचना
खनन मंत्रालय ने एक मोबाइल एप्लीकेशन तैयार किया है, जिसका उपयोग कर अधिकारी अपनी निरीक्षण रिपोर्ट दाखिल कर सकते हैं। इस एप के माध्यम से आम लोग भी अवैध खनन की सूचना दे सकेंगे। वे अवैध खनन की फोटो भी अपलोड कर सकेंगे।