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भूखे रहकर पढ़ाई कर रहे दिव्यांग विद्यार्थी

Wed, 24 Jul 2019 01:39 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 24 Jul 2019 01:39 AM IST
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Physicaly challenged students are not getting food in mes
भूखे रहकर पढ़ाई कर रहे दिव्यांग विद्यार्थी
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छात्र बोले- मेस शुरू नहीं, टूटे दरवाजे, गंदा शौचालय, क्यों दे बढ़ा शुल्क?
डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में दिव्यांग विद्यार्थियों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। उन्हें हॉस्टल तो अलॉट हो गया है, लेकिन यहां न तो विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था है न ही मेस की। दरवाजे टूटे हुए हैं। शौचालय-बाथरूम गंदे पड़े हैं। इसके बाद भी विवि प्रशासन उनसे बढ़ा हुआ शुल्क लेने पर अड़ा है। छात्रों ने खुद इसकी फोटो जारी करते हुए कहा कि वे भूखे रहकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। क्योंकि कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो पा रही है।
आंदोलनरत छात्र मंगलवार को फिर कुलपति प्रो. राणा कृष्णपाल सिंह से मिलने पहुंचे। राष्ट्रीय दृष्टिहीन संघ के सत्येंद्र यादव की पहल पर छात्रों की कुलपति से वार्ता हुई। छात्रों ने बताया कि कुलपति ने उनकी सामान्य कोर्सों में छात्रावास आवंटन की अधिकतम सीमा 5 साल से बढ़ाकर 7 साल करने, उत्तर प्रदेश के बाहर के दिव्यांग छात्रों को भी प्रवेश व मेस सुविधा देने पर सहमति दी। हालांकि उन्होंने बढ़ा हुआ छात्रावास शुल्क वापस लेने से इंकार कर दिया जबकि यह अन्य विश्वविद्यालयों से अधिक है। छात्रों ने बताया कि वे पिछले साल से लगातार मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें पढ़ने से संबंधित सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
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कुलपति ने छात्रों को जल्द से जल्द ऑडियो बुक, ई-टेस्ट व ब्रेल बुक उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। प्रतिनिधिमंडल में मोनू सिंह, शौकत अली, कमल शर्मा आदि शामिल थे। इसके बाद छात्रों ने कहा कि जब छात्रावास इतनी खराब स्थिति में है, तो हम बढ़ा हुआ शुल्क क्यों दे? गर्मी की छुट्टियों में हॉस्टल खाली तो करवाया गया लेकिन उसकी मरम्मत तक नहीं हुई। खराब व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया। कक्षाएं शुरू कर दी गईं लेकिन अब तक मेस का टेंडर नहीं हुआ। परिसर में कैंटीन तक की सुविधा नहीं है।
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छात्राएं फिर लौटीं निराश
एक दर्जन दिव्यांग छात्रों को तो अस्थायी रूप से छात्रावास अलॉट कर दिया गया है, लेकिन दिव्यांग छात्राएं अभी भी भटक रही हैं। छात्रों को हॉस्टल मिलने की सूचना पर दिव्यांग छात्राएं भी परिसर पहुंचीं, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। छात्राओं को बताया गया कि अभी केयरटेकर की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में अभी उन्हें कुछ दिन और इंतजार करना होगा।
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