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लखनऊ विश्वविद्यालय में अब कुलपति भी करा सकेंगे पीएचडी

Tue, 17 May 2022 02:06 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 17 May 2022 02:06 AM IST
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phd in lucknow university
अक्षय कुमार, लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के शिक्षकों के साथ अब कुलपति भी पीएचडी करा सकेंगे। विवि प्रशासन की ओर से हाल ही में पीएचडी का नया अध्यादेश 2020 पास किया गया है। इसमें अन्य संशोधन के साथ यह भी व्यवस्था कर दी गई है। इसका उद्देश्य यह भी है कि कुलपति के पद पर आने वाले शिक्षक सिर्फ प्रशासनिक दायित्व तक ही न सिमट कर रह जाएं, बल्कि शैक्षणिक योगदान भी जारी रखें।
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विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से बीते दिनों पीएचडी का नया अध्यादेश राजभवन भेजा गया था। वहां से हरी झंडी के बाद वर्तमान सत्र 2021-22 के लिए पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी है। अध्यादेश के बिंदु संख्या 6.3 में कहा गया कि निर्धारित योग्यता (शैक्षणिक व शोध) पूरी करने वाले कुलपति भी पीएचडी करा सकेंगे। इससे आने वाले कुलपति के लिए पीएचडी कराने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, अभी इसके विस्तृत दिशा-निर्देश आने बाकी हैं। इस बारे में कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने कहा कि कुलपति पद पर आने वाले लोग किसी न किसी शिक्षण संस्थान के अनुभवी शिक्षक होते हैं। ऐसे में वे सिर्फ एक प्रशासक ही न बनकर रह जाएं, इसलिए व्यवस्था की गई है कि उनका शिक्षण, शोध चलता रहे। उनकी शैक्षणिक सहभागिता भी सुनिश्चित हो सके, क्योंकि किसी भी विवि का मूल वहां की शिक्षण व्यवस्था ही होती है। उन्होंने कहा कि कोई भी कुलपति तीन साल के लिए तैनात होता है। ऐसे में पद पर आने के साथ ही अगर वे पीएचडी सुपरवाइजर बनते हैं तो तीन साल में पीएचडी करा सकते हैं। अगर इस दौरान पीएचडी नहीं पूरी होती है तो कार्यकाल पूरा होने के बाद को-सुपरवाइजर की भूमिका निभा सकते हैं।
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इसी सत्र से कॉलेज शिक्षकों को भी मौका
नए पीएचडी अध्यादेश के तहत दी व्यवस्था के अनुसार ही सत्र 2021-22 से कॉलेजों के शिक्षकों को भी पीएचडी कराने का अवसर दिया गया है। इसी क्रम में रजिस्ट्रार डॉ. विनोद कुमार सिंह ने कॉलेजों को पत्र भेजकर सात मई तक अर्ह शिक्षकों की सूची मांगी थी। इसके बाद विवि के संबंधित विभाग की ओर से इनकी जांच कर रिपोर्ट विवि प्रशासन को 15 मई तक भेजी जानी थी। हालांकि, कॉलेजों ने इसका समय बढ़ाने की मांग की है। जल्द ही पीएचडी प्रवेश आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी।
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