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Lucknow News: पीजीआई पहुंचे पूर्व छात्र, बोले- अरे... 25 साल बाद भी नहीं बदला हॉस्टल की दीवार का रंग
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लखनऊ। पीजीआई क्लीनिक इम्युनोलॉजी विभाग की रविवार को एलुमिनाई मीट हुई। मीट में जब पुराने साथी मिले तो एक-दूसरे को गले लगाकर पुराने दिनों की यादें ताजा कीं।
इस दौरान किसी ने अपने हॉस्टल के कमरे में जाने की इच्छा जाहिर की तो किसी ने अपने पुराने किस्से सुनाए। अमेरिका में रह रही डॉ. वैदेही 25 साल बाद संस्थान आईं तो यहां सब कुछ बदल चुका था। डॉ. वैदेही पढ़ाई दौरान जिस हॉस्टल में ठहरती थी, वहां जाने की इच्छा जाहिर किया। हॉस्टल में पहुंचते ही कहा कि अरे इसी कमरे में तो हम रहते थे। कितना कुछ बदल गया है लेकिन हॉस्टल की दीवार का रंग नहीं बदला। उन्होंने वहां पर सेल्फी ली।विभाग की संस्थापक प्रो. सीता नायक ने बताया कि देश का पहला डीएम छात्र संस्थान के विभाग से निकला था। देश का पहला विभाग यहीं शुरू हुआ था।
बीमारी का पता लगाने के लिए बहुत मेहनत लगती थी
प्रो. आरएन मिश्रा ने बताया कि उस दौर में मरीज की बीमारी का पता लगाना चुनौती भरा था। तब सभी कुछ मैनुअल था। जांच के लिए पहले सब लैब में तैयार करना पड़ता था। अब जांच की सारी किट बनी बनाई आती है।
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डीएम की पढ़ाई करने वाले पुराने छात्रों ने बताए अनुभव
डीएम की पढ़ाई करने वाले पुराने छात्र डॉ. पराशर, डॉ. सज्जन, डॉ. बनवारी लाल शर्मा, डॉ. वैदेही, डाॅ. सिनॉय, डॉ अरुण गुप्ता, डॉ. संदीप उपाध्याय ने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि शिक्षक हर तरह का ज्ञान छात्रों को देते थे। इसका फायदा आज मिल रहा है। यहां से डीएम करके निकले छात्र देश-विदेश में पीजीआई का नाम रोशन कर रहे हैं। वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी रहे एके गुप्ता राजेश्वर दयाल ने बताया कि कैसे विभाग का लाइव प्रशासनिक भवन में एक कमरे में शुरू हुआ था। संस्थान के विभाग में चार बड़ी लैब है।
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इस दौरान किसी ने अपने हॉस्टल के कमरे में जाने की इच्छा जाहिर की तो किसी ने अपने पुराने किस्से सुनाए। अमेरिका में रह रही डॉ. वैदेही 25 साल बाद संस्थान आईं तो यहां सब कुछ बदल चुका था। डॉ. वैदेही पढ़ाई दौरान जिस हॉस्टल में ठहरती थी, वहां जाने की इच्छा जाहिर किया। हॉस्टल में पहुंचते ही कहा कि अरे इसी कमरे में तो हम रहते थे। कितना कुछ बदल गया है लेकिन हॉस्टल की दीवार का रंग नहीं बदला। उन्होंने वहां पर सेल्फी ली।विभाग की संस्थापक प्रो. सीता नायक ने बताया कि देश का पहला डीएम छात्र संस्थान के विभाग से निकला था। देश का पहला विभाग यहीं शुरू हुआ था।
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बीमारी का पता लगाने के लिए बहुत मेहनत लगती थी
प्रो. आरएन मिश्रा ने बताया कि उस दौर में मरीज की बीमारी का पता लगाना चुनौती भरा था। तब सभी कुछ मैनुअल था। जांच के लिए पहले सब लैब में तैयार करना पड़ता था। अब जांच की सारी किट बनी बनाई आती है।
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डीएम की पढ़ाई करने वाले पुराने छात्रों ने बताए अनुभव
डीएम की पढ़ाई करने वाले पुराने छात्र डॉ. पराशर, डॉ. सज्जन, डॉ. बनवारी लाल शर्मा, डॉ. वैदेही, डाॅ. सिनॉय, डॉ अरुण गुप्ता, डॉ. संदीप उपाध्याय ने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि शिक्षक हर तरह का ज्ञान छात्रों को देते थे। इसका फायदा आज मिल रहा है। यहां से डीएम करके निकले छात्र देश-विदेश में पीजीआई का नाम रोशन कर रहे हैं। वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी रहे एके गुप्ता राजेश्वर दयाल ने बताया कि कैसे विभाग का लाइव प्रशासनिक भवन में एक कमरे में शुरू हुआ था। संस्थान के विभाग में चार बड़ी लैब है।