फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   pgi administration in problem

ट्रॉमा सेंटर को लेकर फूले पीजीआई प्रशासन के हाथ-पांव

Thu, 31 Oct 2013 02:04 AM IST
अमित यादव/लखनऊ
अमित यादव/लखनऊ Updated Thu, 31 Oct 2013 02:04 AM IST
विज्ञापन
pgi administration in problem
मुख्य सचिव जावेद उस्मानी के 15 दिसंबर तक ट्रॉमा सेंटर शुरू करने के निर्देश के बाद एसजीपीजीआई प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए हैं।
विज्ञापन


डेढ़ माह के अंदर ट्रॉमा सेंटर का भवन हस्तांतरित हो पाएगा कि नहीं।

बिना मानव संसाधन के ट्रॉमा सेंटर में चिकित्सा सेवाएं कैसे दी जाएंगी।

ये दो ऐस प्रश्न हैं जिनका जवाब वहां के किसी भी अधिकारी के पास नहीं है।

मालूम हो कि एसजीपीजीआई के सामने आवास विकास परिषद की वृंदावन योजना में उत्तर भारत का पहला लेवल फोर ट्रॉमा सेंटर बनाए जाने का सपना लगभग चार साल पहले देखा गया था।

इसे साकार रूप देने की जिम्मेदारी पीजीआई के न्यूरोलॉजी विभाग के हेड प्रो. राजकुमार (वर्तमान में ऋषिकेश एम्स के निदेशक) को सौंपी गई थी।

उन्होंने देश के पहले ऐसे ट्रॉमा सेंटर की रूपरेखा तैयारी की, जिसमें एंबुलेंस से लेकर बड़ी बस तक घायल मरीजों को लेकर सीधे वार्ड तक पहुंच जाए।

18 बेड की इमरजेंसी में पहुंचने के दस मिनट के अंदर मरीज की जांच कर संबंधित विभाग में भेजने की व्यवस्था यहां होनी थी।

जिससे मरीज के लिए कीमती ‘गोल्डेन आवर’ की परिकल्पना को साकार किया जा सके।

यदि सड़क के रास्ते मरीजों को लाने में देरी हो तो एयर एंबुलेंस भी ट्रॉमा सेंटर में तैनात होनी थी।

इसके लिए हैलीपैड भी बनाया जाना था। ट्रॉमा सेंटर में सभी तरह की जांच सुविधाएं एमआरआई, सीटी स्कैन, एक्स-रे, पैथोलॉजी, ब्लड बैंक इस ट्रॉमा सेंटर में था।

विज्ञापन


इमरजेंसी में मेडिकल ऑफिस तैनात किए जाने थे। इससे सिर से पैर तक किसी भी तरह की चोट का इलाज वहीं मिल सके।

न्यूरो सर्जरी, बर्न, प्लास्टिक सर्जरी, गैस्ट्रोसर्जरी, यूरोलॉजी, गायनकोलॉजी, हार्ट सर्जरी, आंख व आर्थोपैडिक सर्जरी के विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती, प्रत्येक विभाग के लिए अलग-अलग मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर बनने थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


यहां तक कि 24 घंटे बिजली के लिए अलग विद्युत उपकेंद्र का निर्माण भी वहां होना था।

पदों के सृजन के लिए एसजीपीजीआई की फाइनेंस कमेटी, एकेडमिक काउंसिल, हॉस्पिटल बोर्ड और गवर्निंग बॉडी की अनुमति भी मिल गई, लेकिन बसपा शासनकाल में पदों की कुछ कटौती को लेकर मामला फंसा लिया गया।

इसी बीच प्रो.राजकुमार ऋषिकेश चले गए। इसी के बाद ट्रॉमा सेंटर के दुर्दिन शुरू हो गए।

उनके जाने के बाद प्रदेश में सपा सरकार आ गई। इस सरकार ने ट्रॉमा सेंटर को शुरू करने के लिए कोशिशें की, लेकिन पदों के सृजन को हरी झंडी नहीं दी।

अब 15 दिसंबर तक ट्रॉमा सेंटर शुरू करने के मुख्य सचिव ने निर्देश दे दिए हैं।

इस बारे में एसजीपीजीआई के निदेशक प्रो.आर.के.शर्मा से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका मोबाइल फोन अनरीचेबल मिला।

लखनऊ की और खबरों के लिए क्लिक करें यहां

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed