लोग काम के बारे में नहीं छुट्टी के बारे में सोचते हैं: राज्यपाल
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आज दफ्तरों का ज्यादातर वक्त चर्चाओं में बीत जाता है। इससे वहां पांच घंटे भी काम नहीं हो पाता है। इतना ही नहीं वे रविवार व छुट्टी के बारे बहुत ही गंभीरता से सोचते हैं। ऐसे लोगों को सेना के उन जवानों के बारे में सोचना चाहिए, जो सियाचिन ग्लेशियर में शून्य डिग्री सेल्सियस से कम तापमान में 24 घंटे ड्यूटी पर मुस्तैद रहते हैं।
ये बातें सूबे के राज्यपाल राम नाईक ने यहां रविवार को नारी शिक्षा निकेतन में आयोजित शहीद सैनिक सम्मान व पुनर्मिलन समारोह में कही। उन्होंने कहा कि हमें सैनिकों से काम करने का सलीका सीखना चाहिए कि वे कैसे विषम परिस्थितियों में अपने कार्य करते हैं।
राज्यपाल ने परमवीर चक्र विजेता शहीद कैप्टन मनोज पांडे के पिता गोपीचंद पांडे और शहीद सुनील जंग महत की मां बीना महत को सम्मानित किया।
इस मौके पर जिलाधिकारी राजशेखर व मध्य यूपी सब एरिया मुख्यालय के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल आरएस मॉल्वे भी मौजूद थे। समारोह का आयोजन डॉ. केएल गर्ग मेमोरियल चेरिटेबल ट्रस्ट की ओर से किया गया।
मैं भी सेना में होता, लेकिन...
राज्यपाल ने समारोह में अपने संस्मरण भी सुनाए। कहा, वह भी सेना में शामिल होना चाहते थे। लेकिन पिताजी के निधन के चलते मुझे जल्द ही नौकरी करनी पड़ी। हालांकि छोटा भाई सेना में अधिकारी बनने में कामयाब हो गया।
दिमाग से राजनीति जाती ही नहीं
राज्यपाल अपने संस्मरण सुनाने के दौरान युद्ध को चुनाव बोल गए। दरअसल उन्होंने 1965 के युद्ध की जगह 1965 का चुनाव कह दिया। फिर भूल सुधार करते हुए बोले- राजनीति अभी भी दिमाग से पूरी तरह नहीं गई है।
सबको साथ लेकर चलते थे अटल जी
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कैबिनेट में राम नाईक पेट्रोलियम मंत्री थे। उस वक्त का एक वाक्या सुनाते हुए कहते हैं कि अटल जी सबको साथ लेकर चलते थे।
कारगिल युद्ध में जब पहली शहादत की सूचना मिली तो कैबिनेट की बैठक में अटल जी से कहा गया कि शहीदों का पार्थिव शरीर उनके पैतृक निवास तक सम्मानपूर्वक पहुंचना चाहिए। अटल जी ने इस सुझाव को सहर्ष स्वीकार कर लिया।
महज 46 जिलों में ही हैं जिला सैनिक अधिकारी
उत्तर प्रदेश पूर्व सैनिक कल्याण परिषद के निदेशक ब्रिगेडियर (अवकाशप्राप्त) अमूल्यमोहन ने कहा कि सूबे के 70 में से 46 जिलों में जिला सैनिक कल्याण व पुनर्वास अधिकारी तैनात हैं। देश में सबसे अधिक 3.75 लाख पूर्व सैनिक यूपी में है। यहांद्वितीय विश्व युद्ध के भी 5423 सैनिक व 43 वीर नारियां हैं।
युद्ध में निशक्त हुए इन जांबाजों को मिला सम्मान
-ले. कर्नल अजीत सिंह, मेजर डीएन सिंह, कैप्टन अरुण कुमार उप्रेती, सिपाही कुंडल सिंह, सिपाही आन सिंह, सूबेदार पान सिंह, सिपाही राजवीर सिंह, सिपाही चंदर सिंह, नायक मदन सिंह रावत, सिपाही अजयपाल शर्मा, शेख गुलाम मुस्तफा, सिग्नलमैन तुलसी राम, सिपाही जीएस खनका, लांसनायक एसडी बहुगुणा, सिपाही कुंदन सिंह भंडारी, सैपर डीसी भटट, नायक शेर सिंह, पीटीआर जगन्नाथ सिंह, ग्रेनेडियर मो. इस्लाम, नायक यादराम, नायक हरसुख सिंह, सिपाही दलीप सिंह, एसडब्ल्यूआर अबुल हसन, सिपाही सज्जन शरण सिंह, सिपाही रमाशंकर, हवलदार फखरे आलम खां, लक्ष्मी देवी, मेजर जेके चौरसिया, मेजर ब्रज कुमार कॉल, राइफलमैन जयहिंद प्रकाश, ग्रेनेडियर हदीश खान और शांति देवी।