कोरोना के साथ खड़ा हुआ खाने का संकट तो लंदन से लौट आए लखनऊ, साझा किया वहां का हाल
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CoronaVirus Latest Updates In Hindi: पूरी दुनिया कोरोना के संकट से जूझ रही है। जबरदस्त दहशत में हैं लोग। डर स्वाभाविक है, लेकिन इसके दबाव में आकर हम अपने लिए कितनी और समस्याएं खड़ी कर रहे हैं, यह किसी को अहसास नहीं। लंदन भी कोरोना की चपेट में है, लेकिन अभी 13 मार्च की सुबह तक सब सामान्य था, लेकिन अचानक से बाजार से खाद्य सामग्री खत्म होने लगी और सीमाएं सील होने की खबर ऐसी फैली कि भारत समेत अन्य देशों से वहां गए स्टूडेंट्स घबरा उठे और अपने-अपने देश लौटने की तैयारी करने लगे।
अकेले लंदन की यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टमिनिस्टर से 89 भारतीय छात्र-छात्राओं ने रातों-रात देश वापसी का फैसला किया। 15 मार्च की रात लखनऊ लौटी रिया श्रीवास्तव और हांगकांग से लौटे पारितोष मनोचा ने साझा किया वहां का हाल।
सीमाएं सील होने की खबर ने किया परेशान
मेरा नाम रिया श्रीवास्तव है। यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टमिनिस्टर से मैं फैशन डिजाइनिंग की पढ़ाई कर रही हूं। मेरे ग्रुप में चार दोस्त हैं। इसमें एक डेनमार्क की है और मुझे लेकर तीन भारतीय हैं। कोरोना की खबरें तो लगातार मिल रही थीं। टेलीविजन और सोशल मीडिया से हम इसके बारे में लगातार खुद को अपडेट किए हुए थे।
कर्फ्यू जैसे हालात नहीं थे, हां कुछ-कुछ चीजें बंद हो रही थीं। पढ़ाई भी सामान्य तौर पर जारी थी। अचानक से 13 मार्च को मानो भूचाल आ गया। जब डेनमार्क की रहने वाली हमारी दोस्त घबराई हुई आई और कहा कि डेनमार्क की सीमा सील हो रही है और रोने लगी।
दरअसल वह इंडियन है लेकिन डेनमार्क में शादी हो गई है, वहीं रहती है। पढ़ने के लिए लंदन आई है। हम लोगों ने पता किया तो पता चला कि यदि सीमा सील हो गईं तो वह तीन माह तक नहीं जा सकेगी। इस बीच लंदन में खाद्य सामग्री की लूट मच गई, दुकानें खाली हो गईं।
यह मेसेज मिला कि खाने को बचा ही नहीं है। सबके बीच बड़ा सवाल था कि खाने को नहीं मिला तो करेंगे क्या। इसके बाद तो दहशत और बढ़ गई और लोगों ने अपने-अपने देश लौटने का फैसला किया। दिल्ली एयरपोर्ट पर परीक्षण के बाद ही मुझे आगे जाने दिया गया। लखनऊ आकर सावधानी बरतते हुए मैने खुद को आइसोलेट कर रखा है।
ईस्ट और वेस्ट, इंडिया इज द बेस्ट
रिया श्रीवास्तव ने कहा, विश्वविद्यालय ने हमारा बहुत खयाल रखा। स्टूडेंट वीजा का बहाना बनाकर हमें रोकने का दबाव बनाया जा सकता था, लेकिन उन्होंने हमें स्टडी फ्रॉम होम की सुविधा दी, हम यहां रहकर भी पढ़ सकेंगे। वहां की स्थानीय सरकार की कोरोना के भय से निपटने की कोशिशें बहुत ढीली हैं।
पहले ही विमान सेवाएं बंद कर देते तो हालात न बिगड़ते। जिस फ्लाइट से मैं आई हूं, उससे 89 भारतीय स्टूडेंट लौटे हैं। लखनऊ के 8-10 छात्र हैं। इनमें से कुछ मुझसे एक दिन पहले और कुछ 16 मार्च को लौटे हैं। भारत आने पर हमें लगा कि हमारा देश जिस तरह से संवेदनशील है, यदि इतनी संवेदनशीलता लंदन ने दिखाई होती तो समस्या इतनी गंभीर न होती। कुछ भी कह लो मगर मैं तो यही कहूंगी कि ईस्ट ऑर वेस्ट, इंडिया इज द बेस्ट।
तीन माह से घर पर बंद, लौटने लगे भारत
बीते तीन माह से हम सब अपने ही घर में नजरबंद से हो गए थे। काम घर से कर रहे थे। लगातार ऐसे हालात हमें नर्वस कर रहे थे। इस बीच वे भारतीय और परेशान हो उठे जिनके बच्चे स्कूलों में पढ़ते हैं। हमारे एक दोस्त बेंगलूरू के रहने वाले हैं। बीते पांच माह में उनके बच्चे सिर्फ 11 दिन स्कूल गए।
स्कूल की फीस महंगी है और लगातार उसे देना पड़ रहा था। पढ़ाई के साथ-साथ जेब भी खाली हो रही थी। वे बीते दिनों बेंगलूरू शिफ्ट हो गए। मैं लखनऊ आया हूं और अब यहीं रहना है। एक-दो दिन में हांगकांग लौटूंगा, ताकि वहां से सारा सामान लेकर आ सकूं। भाई भी यहीं शिफ्ट करेगा।