फोर्ड अस्पताल: मौत के बाद भी करते रहे इलाज, बनाते रहे बिल
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गोमतीनगर, विवेकखंड स्थित फोर्ड अस्पताल में बुजुर्ग की मौत के बाद भी आईसीयू में उसे भर्ती रख डॉक्टर इलाज के नाम पर बिल बनाते रहे। परिवारीजनों को शक हुआ तो वे जबरन आईसीयू में घुस गए तो उन्हें मरीज की मौत होने का पता चला। इसके बाद गुस्साए घरवालों ने करीब दो घंटे तक हंगामा किया।
परिवारीजनों गोमतीनगर पुलिस से लिखित शिकायत कर फोर्ड अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने मामला शांत कराया तो परिवारीजन शव घर ले कर चले गए।
गोंडा, कमरावा गांव के अनिरुद्ध कुमार शुक्ला (72) को खून की उल्टी की शिकायत के बाद फोर्ड अस्पताल में सोमवार शाम को चार बजे भर्ती कराया गया। बेटे बृजेंद्र नाथ शुक्ला ने बताया कि भर्ती कराते ही 30 हजार रुपये जमा करा लिए गए।
इस दौरान डॉक्टर और आईसीयू में तैनात नर्सिंग स्टाफ ने 20 हजार रुपये का दवा और इंजेक्शन अस्पताल की फार्मेसी से मंगवा लिया। शाम चार बजे आईसीयू में भर्ती पिता से बात भी हुई और उन्होंने कहा कि अब वो पूरी तरह ठीक हैं। शाम करीब पांच बजे परिवारीजन मालिक राम शुक्ला मिलने आए तो आईसीयू में तैनात स्टाफ ने मिलने से मना कर दिया। करीब छह बजे के बाद आईसीयू के शीशे से झांककर अंदर देखा तो पिता का सिर लटका हुआ था।
आईसीयू में गए तो ऑक्सीजन नहीं लगी थी मॉनिटर भी बंद था
परिवारीजनों का आरोप है कि मौत के बाद भी मरीज को आईसीयू में भर्ती रखकर बिल बनाया जा रहा था। बृजेंद्र नाथ शुक्ला ने बताया कि मरीज को जब आईसीयू में भर्ती कराया गया था तो ऑक्सीजन के साथ डिजिटल मॉनिटर भी लगाया गया था। शाम छह बजे मरीज की मौत के बाद आईसीयू में जबरदस्ती घुसे तो ऑक्सीजन नहीं लगी थी और मॉनिटर भी बंद पड़ा था।
क्लीनिक से फोर्ड का कनेक्शन
बृजेंद्र ने बताया कि पत्रकारपुरम के विवेक खंड दो में रहने वाले एक डॉक्टर को दिखाया। उसने आधे घंटे तक अपने यहां भर्ती किया और तीस हजार रुपये जमा करा लिए।
आधे घंटे बाद बोला कि हमारे यहां इलाज की बेहतर व्यवस्था नहीं है। इसलिए मरीज को फोर्ड में शिफ्ट करना होगा। सोमवार देर शाम फोर्ड में शिफ्ट किया गया तो मंगलवार को सुबह वो देखने आया इसके बाद वो देखने नहीं आया।
मरीज की मौत के बाद मामले की जानकारी डॉक्टर को दी गई लेकिन वो नहीं आए। परिवारीजनों का आरोप था कि क्लीनिक का डॉक्टर मरीजों को बेचने का काम कर रहा है। पहले अपने यहां भर्ती कर वसूली करता है। उसके बाद फोर्ड अस्पताल में भेजकर मरीज से इलाज के नाम पर लूट की जा रही है।
पहले भी आई थी शिकायत
पिछले साल चिनहट के रहने वाले एक युवक को डॉक्टरों ने दस हजार रुपये न जमा करने पर वेंटिलेटर से हटा दिया था जिससे उसकी मौत हो गई थी। युवक की मौत के बाद अस्पताल का शीशा, फार्मेसी, आईसीयू और एलईडी टीवी तोड़ दी गई थी।
सुलझा लिया गया मामला, हटा दिया स्टाफ
इस पर फोर्ड अस्पताल के सीएमएस डॉ. पंचम सिंह का कहना है कि अनिरुद्ध का इलाज गंभीर हालत में किया जा रहा था। परिवारीजनों का आरोप था कि मरीज की मौत के बाद भी आईसीयू स्टाफ ने जानकारी नहीं दी। इसपर तीनों स्टाफ को हटा दिया गया है।
पीड़ित पक्ष के साथ समझौता हो गया। इलाज के नाम पर बिल बनाने का आरोप गलत है। इलाज डॉ. संजय चौधरी कर रहे थे और उन्होंने परिवारीजनों को इस तरह की जानकारी दी थी। इलाज के नाम पर कोई लूट खसोट नहीं की गई है।