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जेल में बंद लोगों के चुनाव लड़ने पर नहीं लगेगी रोक

Fri, 22 Apr 2016 03:11 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 22 Apr 2016 03:11 PM IST
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people in jail are eligible for election
- फोटो : demo pics

जेल में बंद या न्यायिक हिरासत में रहने वाले लोगों के चुनाव लड़ने पर रोक नहीं लगेगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न्यायिक हिरासत में रहने वालों को चुनाव लड़ने का अधिकार देने के लिए जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में किए गए संशोधन को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। 

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लोकप्रहरी के महासचिव एसएन शुक्ला की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस राजन रॉय ने यह फैसला सुनाया। 
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याचिका में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में उस संशोधन को चुनौती दी गई थी जिसके तहत वोटर लिस्ट में नाम होने की वजह से किसी व्यक्ति के चुनाव लड़ने का अधिकार बहाल कर दिया गया था। 
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इससे पहले पटना हाईकोर्ट ने न्यायिक हिरासत में जेल जाने वाले व्यक्ति को मताधिकार से वंचित रहने की वजह से चुनाव लड़ने पर भी पाबंदी लगा दी थी। इस फैसले के खिलाफ मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुप्रीम कोर्ट गए थे। 

सुप्रीम कोर्ट ने 10 जुलाई 2013 को हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया था। केंद्र सरकार ने पटना हाईकोर्ट के फैसले के बाद ही जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 29 में संशोधन करके इसे 10 जुलाई 2013 से ही प्रभावी कर दिया था।

18 अप्रैल को खारिज हुई थी याचिका

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लोकप्रहरी के महासचिव एसएन शुक्ला ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में संशोधन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर शीर्ष अदालत ने उन्हें हाईकोर्ट जाने के निर्देश दिए। 

हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस राजन रॉय की बेंच ने 18 अप्रैल को इस मामले की सुनवाई करते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी। 
याचिकाकर्ता ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में संशोधन की संवैधानिक वैधता को यह कहते हुए चुनौती दी थी कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला जिस आधार पर था, उसे दूर नहीं किया गया है। 

उन्होंने संसद सदस्य बनने की अर्हता निर्धारित करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 84 पर बहस का जवाब देते हुए डॉ. अंबेडकर के वक्तव्य का हवाला दिया था। 

इसमें उन्होंने कहा कि था कि संसद सदस्य चुने जाने के लिए अन्य अर्हताओं के साथ वोटर होना जरूरी है। जब जेल जाने वाला व्यक्ति वोट डालने के योग्य नहीं है तो वह चुनाव लड़ने के योग्य नहीं हो सकता।

एक्ट में संशोधन असंवैधानिक नहीं

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में संशोधन (एक्ट 29, 2013) में संसद ने यह साफ किया है कि न्यायिक हिरासत में लिए गए व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने का कोई प्रावधान नहीं है। 

अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंचती है कि एक्ट में संशोधन असंवैधानिक नहीं है। दिल्ली हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने मनोहर लाल शर्मा बनाम भारत सरकार में भी एक्ट में संशोधन को गलत नहीं माना है। न्यायिक हिरासत में भेजे जाने पर मतदाता सूची से नाम हटाने संबंधी याचिका पूर्व में अदालत खारिज कर चुकी है।

हाईकोर्ट ने सोमवार को हमारी याचिका खारिज कर दी थी। मैंने अभी पूरा फैसला नहीं पढ़ा है। इसे पढ़ने के बाद तय करेंगे कि पुनर्विचार याचिका दाखिल की जाए या एसएलपी में जाएं।
-एसएन शुक्ला, याचिकाकर्ता 

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