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मरीज को कंधे पर ले जाने को मजबूर तीमारदार, स्ट्रेचर के लिए मांगे जा रहे पैसे

Mon, 11 Feb 2019 11:16 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 11 Feb 2019 11:16 PM IST
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people carrying patients on their solider as lack of streachers
अस्पतालों में नहीं है स्ट्रेचर - फोटो : amar ujala

जिला अस्पताल में व्यवस्थाएं बदहाल हैं। मरीजों को स्ट्रेचर तक मुहैया नहीं हो पा रहा है। अस्पताल पहुंचने वाले गंभीर रोगियों को तीमारदार कंधे पर लादकर ओपीडी तक पहुंचा रहे हैं। तीमारदारों का आरोप है कि स्ट्रेचर मांगने पर 200 से 300 रुपये की डिमांड की जा रही है।

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जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। कभी दवा पर हंगामा होता है तो कभी मरीजों को समय से इलाज नहीं मिल पाता है। इस समय स्ट्रेचर को लेकर हो हल्ला हो रहा है। हालात ये है कि अस्पताल पहुंचने वाले गंभीर रोगियों को एक अदद स्ट्रेचर न मिलने से ओपीडी पहुंचने में नाको चने चबाने पड़ रहे हैं। किसी रोगी को परिवारीजन कंधे पर टिकाकर तो किसी को गोद में उठाकर डॉक्टर के पास ले जाते दिख रहे हैं। शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं हो रही है न ही व्यवस्थाएं दुरुस्त हो पा रही हैं।  
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केस-1 : पयागपुर तहसील क्षेत्र निवासी संतोष कुमार मिश्र के पैर में फ्रैक्चर है। वह रिश्तेदार के साथ रिक्शे से जिला अस्पताल पहुंचे। पैर में प्लास्टर बंधा था। रिश्तेदार स्ट्रेचर लेने गया तो 250 रुपये की डिमांड हुई। संतोष के न दे पाने पर स्ट्रेचर नहीं मिला। इस पर वह रिश्तेदार व लाठी की सहायता से जैसे-तैसे ओपीडी तक पहुंचा, तब डॉक्टर को दिखा पाया।  
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केस- 2 : कैसरगंज तहसील क्षेत्र के फखरपुर निवासी सहजराम की पत्नी की तबियत काफी खराब थी। सहजराम पत्नी को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। लेकिन ओपीडी तक ले जाने के लिए स्ट्रेचर नहीं मिला। सहजराम का कहना है कि 300 रुपये मांगे गए। इतने रुपये नहीं थे। इस पर सहजराम पत्नी को गोद में उठाकर ओपीडी कक्ष तक पहुंचे।  

केस- 3 : ग्राम प्रधान संजय सिंह ने बताया कि गांव निवासी सुमन उसके पड़ोस में रहती है। तबियत खराब होने पर परिवारीजनों के साथ उसे लेकर आया। लेकिन अस्पताल में न तो सुमन को लाने ले जाने के लिए स्ट्रेचर मिला न ही डॉक्टर मिले। इस पर बाहर निजी चिकित्सक के पास ले जाकर इलाज कराया।  

जांच के बाद होगी कार्रवाई

सीएमएस डॉ. डीके सिंह ने बताया कि प्रत्येक वार्ड में स्ट्रेचर उपलब्ध है। लेकिन मरीजों का आना-जाना निरंतर लगा रहता है। ऐसे में प्रति वार्ड एक स्ट्रेचर होने से उसे बदलने में समय लगता है। हो सकता है, इसी कारण दिक्कत हुई हो। स्ट्रेचर के लिए पैसा मांगे जाने की जानकारी नहीं थी। मामला संज्ञान में आया है। जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
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