भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कारगर हथियार बना ‘एंटी करप्शन पोर्टल’, इस तरह की आईं शिकायतें
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी सरकार का एक साल का कार्यकाल पूरा होने पर मार्च 2018 में आम जनता को भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम में आगे आकर लड़ाई लड़ने के लिए एंटी करप्शन पोर्टल की सौगात दी थी। लोग इस पर भ्रष्टाचार के प्रमाण के रूप में ऑडियो व वीडियो अपलोड कर सरकार से शिकायत कर सकते हैं। सरकार इस पर जांच-पड़ताल कर कार्रवाई करवाती है। पिछले एक साल में आम लोगों की शिकायत पर 100 से अधिक अफसरों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है।
स्थानीय स्तर पर सरकारी कर्मियों व संस्थाओं से जुड़े जिम्मेदार लोगों के भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू किए गए एंटी करप्शन पोर्टल को जनता ने हाथोंहाथ लिया है। शिकायतकर्ता की पहचान गुप्त रखने का भरोसा ही है कि पोर्टल पर अब तक 2300 से अधिक शिकायतें की गई हैं। इनमें 1900 से अधिक शिकायतें ऐसी मिलीं जिनमें भ्रष्टाचार के बिंदु शामिल नहीं थे। कई ने तो गाने और परिवार में विवाद की बातचीत ही अपलोड कर दी थी।
ऐसे मामलों को शिकायतकर्ताओं को वापस कर दिया गया। कहा गया कि यदि उनके पास भ्रष्टाचार से जुड़े कोई साक्ष्य हैं तो वे शिकायत फिर भेज सकते हैं। सरकार ने ऑडियो-वीडियो की पड़ताल में 256 शिकायतों को प्रथमदृष्टया कार्रवाई के योग्य माना और विभागों को परीक्षण कर कार्रवाई के लिए भेजा। स्थानीय स्तर पर कार्रवाई योग्य मामले जिलाधिकारियों को भेज दिए गए।
शासन के एक अधिकारी ने बताया कि 256 मामलों में से 117 में कार्रवाई पूरी हो चुकी है। एक मामले को विभाग ने कार्रवाई लायक नहीं माना। 138 शिकायतों पर कार्रवाई किसी न किसी स्तर पर चल रही है। अब भी रोजाना 10 से 15 शिकायतें आ रही हैं।
लगातार होती है मॉनिटरिंग
पोर्टल पर आने वाली शिकायतों की मुख्यमंत्री कार्यालय नियमित मॉनिटरिंग भी कर रहा है। कई मामलों में फील्ड या विभाग स्तर पर मामलों में लीपापोती की कोशिश हुई, लेकिन उसे फिर कार्रवाई के लिए भेजा गया और दोषी कर्मचारी दंडित किए गए। निलंबन, प्रतिकूल प्रविष्टि, एफआईआर तक हुई है। एक मामले में कर्मी को बर्खास्त भी होना पड़ा है।
जनता जागी तो शिकायतों पर यूं हुई कार्रवाई
ऊर्जा विभाग में कर्मचारी बर्खास्त
प्रतापगढ़ में ट्रांसफार्मर लगाने के एवज में पैसे मांगने की शिकायत की गई थी। इसकी जांच के आधार पर निविदा कर्मी देवी प्रसाद (कुशल श्रमिक) को बर्खास्त कर दिया गया।
कमीशन मांगने में नपे भूमि संरक्षण अधिकारी
सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग में बांदा के तत्कालीन भूमि संरक्षण अधिकारी रमेश चंद्र के खिलाफ निर्माण कार्यों का भुगतान न करने, कमीशन मांगने, मनमाने व भ्रष्ट आचरण की शिकायत की गई थी। जांच में आरोप सही पाए जाने पर उन्हें निलंबित कर समादेश मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया। अनुशासनिक जांच की कार्यवाही अंतिम चरण में है।
वरिष्ठ निरीक्षक की भर्त्सना, एक वेतनवृद्धि रुकी
एटा के एक शिकायतकर्ता ने पोर्टल पर वरिष्ठ निरीक्षक विधिक माप विज्ञान सुनील कुमार के खिलाफ पेट्रोल पंप से अवैध वसूली और न देने पर काम रोकने की धमकी की शिकायत की थी। इस मामले में वरिष्ठ निरीक्षक को निलंबित किया गया और जांच के बाद भर्त्सना प्रविष्टि के साथ एक वेतनवृद्धि अस्थायी रूप से रोक दी गई।
बीडीओ के खिलाफ बैठी जांच
एटा में तत्कालीन बीडीओ भगवान सिंह चौहान के खिलाफ घूस लेने की शिकायत हुई थी। मामले में संयुक्त विकास आयुक्त अलीगढ़ मंडल को जांच सौंपते हुए अनुशासनिक कार्यवाही शुरू कर दी गई है।
अपर मुख्य अधिकारी की कुर्सी छिनी, जांच जारी
एक वीडियो के जरिए वाराणसी के प्रभारी अपर मुख्य अधिकारी सुधीर कुमार के खिलाफ एक कांट्रैक्टर से कमीशन मांगने की शिकायत हुई थी। अपर मुख्य सचिव पंचायतीराज के निर्देश पर अधिकारी को जिला पंचायत अनुश्रवण कोष्ठक लखनऊ से संबद्ध किया गया। जिलाधिकारी से शिकायत की जांच कर रिपोर्ट मांगी गई है।
सेवा प्रदाता से चयनित कर्मियों के नवीनीकरण में मांगी रिश्वत, एफआईआर
देवरिया के बीएसए ऑफिस में एमआईएस इंचार्ज के पद पर कार्यरत कर्मी आलोक रंजन मिश्रा के खिलाफ शिकायत की गई थी कि सेवा प्रदाता के माध्यम से तैनात कर्मियों के नवीनीकरण के लिए रिश्वत मांगी जा रही है। इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। इनकी नौकरी गई और नवीनीकरण भी नहीं हो सका।