भाइयों के लिए रेशम के धागों को घर में सजा रहीं बहनें, विशेष बच्चे तैयार कर रहे राखी
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भाई-बहन के अटृट प्रेम का पर्व रक्षाबंधन इस बार कई मायनों में खास होगा। खास इसलिए कि हर बार की तरह इस बार बहिनें बाजार से राखी खरीदकर भाइयों की कलाई पर नहीं बांधेंगी बल्कि खुद अपने हाथों से राखी तैयार कर उनकी कलाई सजाएंगी और उनकी लंबी उम्र और समृद्धि की कामना करेगी। संक्रमण की वजह से लोग बाहर निकलने से कतरा रहे हैं, ऐसे में राजधानी के कई घरों में महिलाएं और बच्चे खुद ही अपने हाथों से राखी तैयार कर भाइयों की कलाई पर सजाने की तैयारी कर रहे हैं।
वहीं, कुछ संस्थानों ने कोविड वॉरियर्स पुलिस कर्मी व डॉक्टरों को राखी बांधने का फैसला किया है। इन सब में एक राखी जो सबसे खास है वो हैं स्पेशल बच्चों और कैंसर सर्वाइवर बच्चों की माताओं द्वारा तैयार की जाने वाली राखियां, जो देसी सामानों से राखी तैयार कर रहे हैं। रक्षाबंधन की तैयारियों और घर पर तैयार की जा रही राखियों पर एक रिपोर्ट...।
भाइयों के साथ पुलिस कर्मियों के लिए तैयार कर रहे राखी
रत्नागिरी सेवा संस्थान की शक्ति वाजपेयी, उर्वशी सिंह और पल्लवी पांडेय की दोपहर इन दिनों किसी एक के घर पर बीतती है। सारा काम निपटाने के बाद ये लोग राखी बनाने का सामान लेकर बैठ जाती हैं। शक्ति बताती हैं कि हम लोगों ने तय किया है कि अपने-अपने इलाके में पुलिसकर्मियों को राखी बांधेंगी। हमारी संस्था की सभी सदस्य अपने-अपने इलाके, अपने-अपने घर में रहकर राखियां तैयार कर रहीं हैं। इसमें एक भी सामान चीन का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।
डॉक्टरों के लिए तैयार कर रहे रेशम की डोर
स्त्री वेलफेयर फाउंडेशन की नीलू त्रिवेदी, तजिन्दर कौर व अमिता सिंह कहती हैं कि कोरोना के चलते हमने बाहर की राखी न खरीद कर घर में ईको फ्रेंडली राखी बनाने का संकल्प लिया है। नीम की पत्ती, अक्षत, मौली, मोती व सूती धागे का इस्तेमाल कर राखी बना रहे हैं। खास बात है कि संस्था की ओर से पांच डॉक्टरों को राखी बांध कर हम कोरोना योद्धाओं को सलाम करेंगे।
विशेष बच्चों की खास राखियां
दृष्टि सामाजिक सेवा संस्थान के विशेष बच्चे इन दिनों राखियां, पूजा थाल बनाने में व्यस्त हैं। इनकी लगन, इनका उत्साह और इनकी मेहनत एक सकारात्मक ऊर्जा से भरने के लिए काफी है। कोरोना की दहशत से घबराए लोगों को इनसे जरूर मिलना चाहिए। ये बच्चे इन दिनों राखियां बना रहे हैं। दरअसल इनकी यह व्यावसायिक ट्रेनिंग भी है ताकि आगे चलकर ये आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो सकें। इनके द्वारा ऑर्डर पर राखियां बनाई जा रही हैं।
कैंसर सर्वाइवर बच्चों की मांएं भी दिन-रात कर रहीं मेहनत
महामारी के इस दौर में आत्मनिर्भरता की एक सशक्त मिसाल हैं कैंसर सर्वाइवर बच्चों की मां। कैंसर पीड़ित बच्चों के लिए काम करने वाली संस्था ईश्वर वेलफेयर फाउंडेशन की मदद से सरला व उनके ग्रुप की महिलाएं इन दिनों देसी सामानों से राखियां तैयार कर रही हैं। खास बात है कि अब ये सभी महिलाएं ऑनलाइन बिजनेस में माहिर हो गई हैं।
दादी-पोते साथ मिलकर तैयार कर रहे राखी
मंजु जैन और उनके पोते अर्नव व अरहम जैन इस बार साथ मिलकर राखियां तैयार कर रहे हैं। मंजु कहती हैं कि कोरोना की वजह से इस बार बाजार जाना नहीं है, इसलिए घर के सामानों से ही हम राखियां तैयार कर रहे हैं। बहू रित जैन कहती हैं कि सासू मां के दिए टिप्स से ही राखियां बनाने में मजा भी आ रहा है। इस बहाने बच्चे भी कुछ न कुछ सीखते रहते हैं।