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क्या इस बजट में पूरे होंगे ये अधूरे वादे?

Tue, 24 Feb 2015 11:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला,लखनऊ Updated Tue, 24 Feb 2015 11:25 AM IST
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Pending work of previous budget.

प्रदेश का वित्त वर्ष 2015-16 का बजट मंगलवार को विधानसभा में पेश किया जाएगा। इसमें जनकल्याण के दावों के साथ कई घोषणाएं भी होंगी लेकिन, बीते साल के बजट में लखनऊ के लिए जो घोषणाएं हुईं क्या वे पूरी हुईं? उनका मौजूदा स्टेटस और भविष्य क्या है?

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सीएम अखिलेश राजधानी में देश के सबसे अधिक बेड संख्या वाले अस्पताल के तौर स्थापित करने के लिए यहां जारी निर्माण कार्यों में तेजी लाना चाहते थे। सरकार को उम्मीद थी कि इससे शताब्दी फेज-2, ट्रॉमा सेंटर के ट्रॉमा एंड इमरर्जेंसी मेडिसिन विभाग, एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर, खदरा में 960 बेड की क्षमता का गर्ल्स हॉस्टल, नर्सिंग हॉस्टल के निर्माण में तेजी आएगी।
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स्टेटस : उम्मीदें बहुत थीं, लेकिन 400 करोड़ के बजट से जो काम हो सकते थे, वे भी पूरे नहीं किए जा सके। यहां तक कि केजीएमयू में उपकरणों के लिए 72 करोड़ रुपये मांगे लेकिन मिले सिर्फ 48 करोड़ रुपये। नुकसान : फेज टू अब भी अधूरा।

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एसजीपीजीआई को 368 करोड़ रुपये

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संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस को राजधानी में दूसरा सबसे ज्यादा बजट का प्रावधान था। इस पैसे से यहां इमरजेंसी मेडिसिन विभाग और एडवांस ऑप्थमोलॉजी सेंटर की स्थापना जैसे बड़े काम किए जाने थे, जिनकी घोषणा खुद सीएम अखिलेश ने यहां के दीक्षांत समारोह में की थी।

एडवांस ऑप्थलमोलॉजी विभाग की स्थापना तो कर दी गई लेकिन न तो ट्रॉमा सेंटर शुरू हो पाया और न ही इमरजेंसी मेडिसिन विभाग। स्टेटस : ट्रॉमा सेंटर का भवन खड़ा हो गया लेकिन इलाज नहीं शुरू हुआ जबकि इमरजेंसी मेडिसिन विभाग अब भी फाइलों में है।

नुकसान : एसजीपीजीआई ट्रॉमा सेंटर न शुरू होने से केजीएमयू पर मरीजों का लोड बढ़ गया। इलाज न मिलने से सरकार की छवि को भी धक्का लगा है।

लोहिया इंस्टीट्यूट को 184 करोड़ रुपये

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सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट कहे जा रहे राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस को सरकार ने 184 करोड़ रुपये देकर यहां के स्टाफ की आवासीय जरूरतें पूरी करने और चिकित्सकीय उपकरण उपलब्ध करवाने का तर्क दिया था।

यहां एनर्जी लीनियर एक्सीलिनिरेटर और नई कैथ लैब की स्थापना होनी थी। 14 बेड का आईसीयू शुरू होना था। 48 सीनियर चिकित्सकों की नियुक्ति होनी थी।

स्टेटस : अधिकतर कार्य पूरा
नुकसान : रेजीडेंट डॉक्टर नहीं मिले। इलाज प्रभावित

मॉडल पुलिसिंग मॉडर्न कंट्रोल रूम

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राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए प्रदेश सरकार ने प्रमुख चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने और मॉडर्न कंट्रोल रूम बनाने की घोषणा की थी। इसके लिए लखनऊ सहित प्रदेश भर में करीब साढ़े 7 सौ करोड़ रुपये का प्रावधान था।

स्टेटस : राजधानी को सीसी टीवी कैमरे मिले तो साथ ही डायल 100 पुलिस सहायता युक्त मॉडर्न पुलिस कंट्रोल रूम भी मिला।

फायदा : सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिली है। वहीं अपराध होने पर मौके पर पहुंचने में पुलिस का रिकॉर्ड बेहतर हुआ है, 100 नंबर डायल करने पर अगर कॉल किसी वजह से कट जाए तो कॉल बैक जैसी सुविधा की शुरुआत हो गई है ताकि अपराधों पर समय रहते काबू पाया जा सके।

हरियाली के लिए 20 करोड़ रुपये

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लखनऊ सहित प्रदेश के 6 जिलों में घटती हरियाली को बढ़ाने के लिए बजट में 20 करोड़ रुपये का प्रावधान करते हुए ‘टोटल फॉरेस्ट कवर’ योजना तैयार की गई थी। इसे तीन साल में पूरा होना था।

स्टेटस : बजट को आए तकरीबन 8 महीने बीत चुके हैं, 1 हजार हेक्टेयर भूमि चिह्नित हुई जहां अभी तक पौधरोपण करने का प्रस्ताव है। यह योजना अभी जमीन पर नहीं उतरी है। वन विभाग के डीएफओ एससी यादव बताते हैं कि 15 हेक्टेयर भूमि में ट्री गार्ड व ब्रिक गार्ड लगाकर पौधरोपण करना है। इसके लिए मानसून का इंतजार किया जा रहा है।

नुकसान : एक चीनी कहावत है कि वृक्ष लगाने का सबसे अच्छा समय 25 साल पहले था और दूसरा अच्छा मौका ठीक अब है। यानी देर नहीं करनी चाहिए। ‘टोटल फारेस्ट कवर’ योजना तीन साल के लिए थी, जिसके पहले आठ महीने में अगर पौधे लगा दिए जाते तो आगे का समय में उन्हें संरक्षित करने में लगाया जा सकता था।

अब मानसून के इंतजार में लगभग पूरा साल ही बेकार जाना तय है, यानी पौधे लगाने में देरी हो चुकी है। वन विभाग की तैयारी ऐसी है कि इस दफा भी योजना के लक्ष्य का 70 प्रतिशत पौधरोपण ही हो सकेगा, क्योंकि गड्ढे उतने के लिए खोदे गए हैं।

गोमती को सुधारने के लिए 83 करोड़

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बजट में राज्य सरकार ने 83 करोड़ रुपये का प्रावधान करते हुए गोमती के साथ-साथ यमुना और गंगा के घाटों को सुधारने की बात कही थी। वित्त वर्ष 2014-15 में इस दौरान गोमती के हिस्से में 10 करोड़ आने की बात कही जा रही थी।

स्टेटस : राजधानी को इस मामले में उम्मीद से ज्यादा मिला। करीब 40 करोड़ रुपये खर्च करके गोमती की सफाई और इसके दोनों ओर डायफ्रॉम वॉल बनाने की योजना पर सिंचाई विभाग ने काम शुरू कर दिया है।

सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता रूप सिंह कहते हैं कि आगामी मानसून तक नदी की सफाई हो जाएगी। यह प्रदूषण से मुक्त हो जाएगी तो सरकार यहां जल्द से जल्द रिवर फ्रंट डेवपलमेंट प्रोजेक्ट पर काम शुरू करवा सकेगी।

फायदा : राजधानी को इस योजना से साफ नदी मिलने की उम्मीद बंधी है। हालांकि योजना में अगर देरी हुई और मानसून समय पहले आ गया तो योजना के अधूरे में छूटने का खतरा बना हुआ है।

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