पार्टियों में दिखने लगा 'आप' की टोपी का खौफ
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भाजपा नेता दावा तो करते हैं कि ‘आप’ का न तो उन्हें डर है और न वह इस पार्टी के दबाव में हैं।
जैसे-जैसे वक्त चुनाव की तरफ सरक रहा है, वैसे-वैसे ‘आप’ की टोपियों से भाजपा के भीतर का खौफ इनके नेताओं के चेहरों पर दिखाई देने लगा है।
‘आप’ की काट खोजना शुरू हो गया है। ‘आप’ के नेताओं को घेरने के लिए संस्थाओं को विदेशी चंदा को मुद्दा बनाने की तैयारी है। लोगों के बीच कांग्रेस और आप के रिश्तों को भी मुद्दा बनाकर हमला बोलने का फैसला किया गया है।
भाजपा की तरफ से एक परचा भी तैयार कराने की योजना है। इस परचे में दिल्ली में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. हर्षवर्धन के भाषण के अंश शामिल करने के साथ ‘आप’ के नेताओं से जुड़ी संस्थाओं को विदेशों से मिले चंदे का ब्योरा भी दिया जाएगा।
परचे के जरिये भाजपा कार्यकर्ता लोगों को समझाएंगे कि इन संस्थाओं के तार ‘आप’ के महत्वपूर्ण नेताओं से जुड़े हुए हैं। इसलिए अगर ‘आप’ मजबूत हुई तो विदेशों का भारत पर वर्चस्व और हस्तक्षेप बढ़ेगा।
मोदी की महारैली से होगी शुरुआत
‘आप’ को लेकर भाजपा की चिंता का अनुमान मोदी की लखनऊ में 2 मार्च को आयोजित महारैली की तैयारियों से भी मिलता है। इस महारैली से आप के खिलाफ मोर्चा खोला जाएगा। आप को वोट देने को कांग्रेस को वोट देना बताया जाएगा।
टोपियों के जवाब में टोपियां
भले ही दो दिन पहले यहां पत्रकारों से बातचीत कर रहे भाजपा प्रदेश प्रभारी अमित शाह ने यह दावा किया हो कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा भाजपा को ‘आप’ को हल्के में न लेने की सलाह देने की उन्हें कोई जानकारी नहीं है।