पेंट कारोबार को डेढ़ महीने में करीब 400 करोड़ का नुकसान, व्यापारी बदहाल, रिटेलर व पेंटर की हालत खस्ता
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लॉकडाउन से पेंट उद्योग भी बदहाल है। इस सेक्टर से जुड़े उद्यमी, होलसेल डिपो, डिस्ट्रीब्यूटर, डीलर, रिटेलर, ऑर्किटेक्ट, इंटीरियर डिजाइनर, कांट्रेक्टर, ठेकेदार, पेंटर व हेल्पर समेत अन्य कर्मचारियों की हालत खस्ता है। करीब डेढ़ महीने से पेंट कारोबार बंद होने से करीब 400 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है। अब उद्योग को संजीवनी देने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जरूरी सहूलियतों के लिए गुहार लगाई गई है।
व्यापारियों ने सरकार से की ये मांगें
- केंद्र व प्रदेश सरकार को की जाने वाली आपूर्ति से जुड़ा भुगतान इन्वाइस प्राप्त होने के 30 दिन के अंदर हो।
- ऑड व इवेन या दिन के कुछ घंटों के आधार पर काम की अनुमति दी जानी चाहिए।
- जिस अवधि में काम नहीं हो रहा है, उस अवधि में कर्मचारियों को 50 प्रतिशत वेतन देने की छूट।
- ऋण पर ब्याज 90 दिन का बढ़ाने की जगह इस अवधि का ब्याज पूरी तरह माफ किया जाए।
- कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाए और बिजली बिल वास्तविक खर्च पर लिया जाए।
- जीएसटी व रिटर्न जमा करने की तिथि लॉकडाउन खत्म होने के बाद 90 दिन की जाए।
- वाणिज्यिक भवनों, दुकानों व गोदाम के हाउस टैक्स में 50 प्रतिशत छूट दी जाए।
- प्राइवेट कंपनियों की तरह पार्टनरशिप फर्मों को भी 22% आयकर भुगतान के दायरे में लाया जाए।
लॉकडाउन से घरों को पलायन कर गए कारीगर व पेंटर: राजीव
यूपी पेंट्स व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष राजीव गुप्ता बताते हैं कि यह सेक्टर पेंट, व्हाइट सीमेंट, सैनिटाइजर, वाटर प्रूफिंग, डेकोरेटिव व प्रोडक्टिव कोटिंग के उत्पाद तैयार करता है। इस उद्योग में लाखों ऐसे कारीगर हैं, जो रोज कमाते-खाते हैं। लॉकडाउन के चलते कारीगर व पेंटर घरों को पलायन कर गए हैं, मगर कमाई का कोई साधन न होने से वे परेशान हैं और आना चाहते हैं। पेंट व इससे जुड़े प्रोडक्ट का करीब 7500 करोड़ रुपये का वार्षिक कारोबार है। लॉकडाउन में 400 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है। करीब दो लाख लोगों की मुश्किलें बढ़ी हैं।
दो महीने में 22 प्रतिशत कारोबार को झटका : सुशील
बर्जर पेंट्स के जीएम यूपी-उत्तराखंड सुशील शर्मा बताते हैं कि पेंट भी बिल्डिंग सामग्री की तरह आवश्यक वस्तुओं में है। इस सेक्टर के ज्यादातर उद्यमी एमएसएमई के अंतर्गत आते हैं। इंडस्ट्री में 10 से 40 लाख की पूंजी से कारोबार करने वाले हैं तो 70 प्रतिशत 1 से 2 लाख की पूंजी वाले हैं। करीब 2500 करोड़ का ब्रांडेड पेंट और इसका दोगुना गैर ब्रांडेड पेंट का कारोबार है। यह सेक्टर सरकार को उच्च दर की जीएसटी देता है। अप्रैल व मई मिलाकर वर्ष का करीब 22 प्रतिशत कारोबार प्रभावित हो चुका है। प्रदेश में करीब 15-16 हजार डीलर व 55-60 हजार पेंटर होंगे। ऑर्गेनाइज्ड से दोगुना अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर में लोग जुड़े हैं जिनकी आय का कोई दूसरा साधन नहीं है।
पेंट बिना मशीनों का प्रोडक्शन पूरा नहीं : राजेश
एडिशन पेंट्स में लीडर सेल्स एंड मार्केटिंग राजेश शर्मा बताते हैं कि इंडस्ट्री का कैश फ्लो बंद है। उनकी कंपनी कॉमर्शियल वाहन, एग्री इक्युपमेंट, ट्रांसफार्मर, डिफेंस में मिसाइल की कवर आदि पर पेंटिंग के साथ लुब्रिकेंट्स का काम करती है। सरकार ने ट्रांसपोर्टेशन व ट्रैक्टर निर्माण की अनुमति दी है, लेकिन पेंट से जुड़े कामकाज की अनुमति नहीं हैं। कोई भी ट्रैक्टर व मशीन बिना पेंट के बिक्री नहीं हो सकता। दूसरे उद्योगों की तरह पेंट उद्योग के भी संचालन की अनुमति दी जानी चाहिए। सीमित मैनपावर व शर्तों के साथ काम करेंगे। राजेश कहते हैं कि उनकी कंपनी ने कानपुर व लखनऊ में अपनी सर्विस प्वाइंट बढ़ाने की योजना बनाई थी। इससे काफी लोगों को रोजगार मिलता।
राहत न मिली तो कर्ज से दब जाएगा उद्यमी : मुरारीलाल
आगरा के पेंट व इससे जुड़ी सामग्री के कारोबारी तथा यूपी पेंट्स व्यापार मंडल के प्रदेश कोषाध्यक्ष मुरारीलाल गोयल बताते हैं कि प्रदेश में पेंट उद्योग से जुड़े करीब 50 हजार विक्रेताओं का 4000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है। पेंट उद्योग से करीब 5 लाख पेंटर कारीगर जुड़े हैं। इनके लिए परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। सरकार ने यदि इस उद्योग को राहत नहीं दी तो उद्यमी कर्ज से दब जाएंगे। लाखों कर्मचारी बेरोजगार हो जाएंगे। केंद्र व राज्य सरकार को राहत के लिए प्रत्यावेदन दिया गया है।
पेंट व व्हाइट सीमेंट की दुकानों को भी मिले छूट : चक्रवाल
पूर्वांचल पेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र चक्रवाल बताते हैं कि कई जिलों में बिल्डिंग मैटेरियल व सेनेटरी प्रोडक्ट की दुकानें खोलने की अनुमति दी गई है, लेकिन पेंट से जुड़ी दुकानों को नहीं है। बिल्डिंग निर्माण में बड़ी मात्रा में प्रयोग होने वाली व्हाइट सीमेंट और एसेंसियल वस्तुओं में शामिल सैनिटाइजर (5 लीटर या इससे अधिक मात्रा के पैक वाले सैनिटाइजर व फ्लोर सैनिटाइजर) बनाने का काम पेंट उद्यमी ही करते हैं। पूरे पूर्वांचल में पेंट व हार्डवेयर का करीब 700 करोड़ का कारोबार है। इससे न सिर्फ उद्यमी, कारोबारी व पेंटर प्रभावित हैं, बल्कि सरकार को बड़े राजस्व की भी क्षति हो रही है।
पेंटर, हेल्पर, कांट्रैक्टर को श्रम योजनाओं का लाभ भी मुश्किल : वीरेंद्र
पेंटिंग कांट्रैक्टर वीरेंद्र कुमार बताते हैं कि इस इंडस्ट्री में कांट्रैक्टर और पेंटर की चेन सबसे अहम है। हजारों की संख्या में कांट्रैक्टर हैं और एक-एक कांट्रैक्टर के साथ दर्जनों पेंटर हैं। ये पेंट निर्माता कंपनियों से जुड़कर काम करते हैं। कांट्रैक्टर की एक दिन की कमाई 1000-1500 रुपये और पेंटर 400-500 रुपये तक कमाता है। लॉकडाउन से सभी की रोजी-रोटी ठप है। इनमें ज्यादातर श्रम विभाग से पंजीकृत नहीं हैं, जिससे श्रमिकों को सरकार की मदद भी नहीं मिल पा रही है।
सबसे मुश्किल में पेंटर : उदय
गोंडा में उदय आर्ट्स के संचालक उदय गुप्ता बताते हैं कि पेंटिंग के काम में सामान्य दिनों में 4000-5000 रुपये तक कमाई हो पाती है। इसमें दुकान किराया, बिजली बिल, साथ में काम करने वाले स्टाफ का वेतन व जीएसटी अदा करना होता है। एक-एक पेंटर से करीब आधा दर्जन से एक दर्जन लोगों का परिवार पलता है। ऐसे में सबसे ज्यादा मुश्किल में पेंटर हैं। सरकार को इनकी मदद के लिए कदम उठाने चाहिए। कम से कम छह महीने के लिए बिजली बिल व जीएसटी की अदायगी से राहत तथा दुकान किराया व स्टाफ वेतन के भुगतान में मदद करनी चाहिए।