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ट्रॉमा सेंटर में एक-एक सांस को तरसे मरीज

लखनऊ/इंटरनेट डेस्क Updated Thu, 08 Aug 2013 02:04 AM IST
oxygen shortage in trauma center
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किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी ट्रॉमा सेंटर में मंगलवार सुबह ऑक्सीजन आपूर्ति ठप हो गई।
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सप्लाई ठप होने से पीडियाट्रिक इमरजेंसी, ट्रॉमा वेंटीलेटर यूनिट, मेडिसिन आईसीयू और न्यूरो सर्जरी विभागों में हड़कंप मच गया। करीब एक घंटे तक आपूर्ति बाधित रही।

वेंटीलेटर यूनिट में तो ऑक्सीजन सिलेंडर से मरीजों को सपोर्ट दिया गया, जबकि पीडियाट्रिक इमरजेंसी में एम्बुबैग से बच्चों को राहत पहुंचाने की कोशिश की गई लेकिन इस दौरान कई मरीजों की मौत हो गई और कई की हालात बिगड़ गई।

पीडियाट्रिक इमरजेंसी, टीवीयू और मेडिकल आईसीयू और न्यूरो सर्जरी इमरजेंसी में ऑक्सीजन खत्म होने की जानकारी हुई तो अफरातफरी मच गई।

आननफानन में ट्रॉमा प्रशासन को इसकी सूचना दी गई। रेजीडेंट डॉक्टरों ने मरीजों को बचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था शुरू की।

किसी तरह एम्बुबैग से एक-दो बच्चों को कृत्रिम व्यवस्था दी गई लेकिन बच्चे ज्यादा होने के कारण अफरातफरी मची रही।

बताया जा रहा है कि पीडियाट्रिक विभाग में भर्ती त्रिलोक, रिद्धि, अनुपम, अर्पित नाम के बच्चों की मौत इसी दौरान हुई।

सिलेंडर खत्म होने की सूचना मिलते ही ट्रॉमा सेंटर ऑक्सीजन प्लांट के सुपरवाइजर और कर्मचारी वहां से भाग निकले। दूसरे प्लांट से सिलेंडर मंगाकर आपूर्ति बहाल करने में करीब एक घंटे लग गए।

बदहाल हैं ऑक्सीजन प्लांट
केजीएमयू में विभागों में ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए 12 प्लांट हैं। इनमें से कुछ नए हैं लेकिन बाकी प्लांट पुराने हैं।

पुराने प्लांट्स की जर्जर पाइप लाइन और कम्प्रेशर को रिपेयर कर काम चलाया जा रहा है। इससे गैस का प्रेशर अक्सर कम हो जाता है।

सबसे बुरी हालत ट्रॉमा सेंटर और पीडियाट्रिक विभाग की है। यही हाल ट्रॉमा सेंटर के ऑक्सीजन प्लांट का है। 2003 में लगाया गया ऑक्सीजन प्लांट जिस समय शुरू किया गया था, उस समय ट्रॉमा सेंटर में बेडों की संख्या 50 ही थी।

इस समय बेड संख्या बढ़कर 280 से अधिक हो चुकी है। इसमें ट्रॉमा वेंटीलेटर यूनिट के 12 बेड भी शामिल हैं। न्यूरो सर्जरी और पीडियाट्रिक विभाग, सर्जरी में भी ऑक्सीजन की 24 घंटे जरूरत होती है।

इसके बावजूद ऑक्सीजन प्लांट की क्षमता को नहीं बढ़ाया गया। बताया जा रहा है कि केजीएमयू में जितने ऑक्सीजन सिलेंडर सभी विभागों में इस्तेमाल होते हैं उसके आधे तो ट्रॉमा सेंटर में होते हैं। यहां 200 सिलेंडर रोज इस्तेमाल होते हैं।

आए दिन जिंदगी दांव पर
केजीएमयू में ऑक्सीजन आपूर्ति में लापरवाही के चलते आए दिन मरीजों की जिंदगी दांव पर लगती रहती है।

इससे पहले 25 मार्च को ऑक्सीजन प्लांट से ट्रॉमा सेंटर की आपूर्ति लाइन का पाइप फटने से ऑक्सीजन का प्रेशर कम हो गया था।

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