लखनऊ। राजधानी में अपराध से करोड़ों-अरबों की संपत्ति बनाने वाली बड़ी मछलियों पर कानूनी शिकंजा कसने जा रहा है। पुलिस आयुक्त ने गैंगस्टर के आरोपी बिल्डर और अपराधियों पर कार्रवाई का खाका तैयार कर लिया है। बुधवार को पुलिस अधिकारियों ने जिला प्रशासन के अफसरों संग बैठक कर इस पर चर्चा की। इसमें रोहतास कंपनी के एमडी परेश रस्तोगी व उसके भाइयों और कंपनी के निदेशकों समेत कई बिल्डर व कुख्यात अपराधी शामिल हैं। रोहतास डवलपर्स कंपनी के एमडी परेश रस्तोगी, पीयूष रस्तोगी, दीपक रस्तोगी, पंकज और रोहित समेत कई निदेशकों व अधिकारियों के खिलाफ हजरतगंज, विभूतिखंड, गोमतीनगर समेत अन्य थानों में धोखाधड़ी व ठगी के 50 से अधिक केस दर्ज हैं। कंपनी ने वर्ष 2011 व 2013 में रायबरेली और सुल्तानपुर रोड पर 111 व 210 एकड़ जमीन पर हाईटेक टाउनशिप बनाने का झांसा देकर चार हजार लोगों से 15 करोड़ रुपये से अधिक रकम ठगी थी। विभूतिखंड में कंपनी ने जो प्रेसीडेंशियल टावर और प्लूमेरिया अपार्टमेंट बनाया, वहां रह रहे 1200 आवंटियों के फ्लैट गिरवी रखकर करोड़ों रुपये हड़प लिए थे। कंपनी संचालकों ने सभी संपत्तियों का मालिकाना हक बदलकर फ्लैट गिरवी रखे और सारी रकम नोएडा के प्रोजेक्ट में लगा दी थी। किस्त न मिलने पर बैंक ने जब आवंटियों के फ्लैट में नोटिस चस्पा की तब फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ था। सिर्फ हजरतगंज कोतवाली में ही 133 लोगों ने डेढ़ अरब रुपये की ठगी के आरोप में केस कराया था। हजरतगंज पुलिस रोहतास कंपनी के मालिकों पर गैंगस्टर की कार्रवाई भी कर चुकी है। सभी आरोपी लंबे अरसे से घर से भागे हैं। रोहतास पीड़ित संघर्ष समिति लंबे अरसे से ठगी के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और न्याय के लिए संघर्षरत है। विकास दुबे जैसे सफेदपोश अपराधियों के खूनी कांड करने के बाद पुलिस अधिकारियों का रोहतास और अन्य सफेदपोश व कुख्यात अपराधियों की ओर ध्यान गया और इनकी सूची निकलवाकर कार्रवाई का खाका तैयार किया गया। पुलिस आयुक्त ने बताया कि रोहतास, आर संस, शाइन सिटी जैसे रीयल एस्टेट के बड़े ठगों के अलावा सीरियल किलर सलीम, रुस्तम, सोहराब, उनका गुर्गा अकील अंसारी और अन्य गैंगस्टर की संपत्तियों की सूची बनवाई जा रही है। जल्द गैंगस्टर एक्ट के तहत इन्हें जब्त किया जाएगा। 306 गैंगस्टर के खिलाफ चलेगा अभियान राजधानी में 306 गैंगस्टर हैं, जिनकी संपत्तियों का ब्यौरा जुटाया जा रहा है। पुलिस आयुक्त ने बताया कि सभी थाना प्रभारियों को इस काम में लगाया गया है। कमिश्नरेट लागू होने के बाद गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई और संपत्ति जब्त करने का अधिकार पुलिस को मिल गया है, इसलिए अभियान चलाया जा रहा है।