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छात्रावास अधीक्षकों की फर्जी नियुक्ति मामले में त्वरित जांच के आदेश
Sat, 28 Nov 2020 02:40 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Sat, 28 Nov 2020 02:40 AM IST
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- फोटो : pixabay
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समाज कल्याण विभाग में छात्रावास अधीक्षकों की फर्जी नियुक्ति मामले में त्वरित जांच के आदेश दिए गए हैं। शासन के निर्देश पर जांच तीन दिन के भीतर पूरी करने के लिए कहा गया है।
समाज कल्याण निदेशालय ने गाजीपुर, फतेहपुर, अंबेडकरनगर और प्रयागराज में तैनात सात छात्रावास अधीक्षकों के स्नातक की मार्क्सशीट की फोटोकॉपी संलग्न करते हुए संबंधित जिला समाज कल्याण अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। इसमें पूछा गया है कि इन छात्रावास अधीक्षकों ने विज्ञापन में दिए गए विषयों में स्नातक किया है या नहीं?
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत की गई है कि वर्ष 2008-09 में समाज कल्याण विभाग में छात्रावास अधीक्षकों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला गया था। इसमें योग्यता मनोविज्ञान या समाजशास्त्र के विषय के साथ स्नातक रखी गई थी, जबकि उन अभ्यर्थियों का चयन भी कर लिया, जिनके पास स्नातक में मनोविज्ञान या समाजशास्त्र विषय नहीं है।
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उधर, विभागीय सूत्रों के मुताबिक दो छात्रावास अधीक्षक ऐसे मिले हैं, जिन्होंने स्नातक तृतीय वर्ष में समाजशास्त्र या मनोविज्ञान विषय नहीं रखा है। इनके मामले में विशेषज्ञों से राय ली जा रही है कि इन्हें समाजशास्त्र या मनोविज्ञान से स्नातक माना जाएगा या नहीं।
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समाज कल्याण निदेशालय ने गाजीपुर, फतेहपुर, अंबेडकरनगर और प्रयागराज में तैनात सात छात्रावास अधीक्षकों के स्नातक की मार्क्सशीट की फोटोकॉपी संलग्न करते हुए संबंधित जिला समाज कल्याण अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। इसमें पूछा गया है कि इन छात्रावास अधीक्षकों ने विज्ञापन में दिए गए विषयों में स्नातक किया है या नहीं?
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गौरतलब है कि मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत की गई है कि वर्ष 2008-09 में समाज कल्याण विभाग में छात्रावास अधीक्षकों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला गया था। इसमें योग्यता मनोविज्ञान या समाजशास्त्र के विषय के साथ स्नातक रखी गई थी, जबकि उन अभ्यर्थियों का चयन भी कर लिया, जिनके पास स्नातक में मनोविज्ञान या समाजशास्त्र विषय नहीं है।
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उधर, विभागीय सूत्रों के मुताबिक दो छात्रावास अधीक्षक ऐसे मिले हैं, जिन्होंने स्नातक तृतीय वर्ष में समाजशास्त्र या मनोविज्ञान विषय नहीं रखा है। इनके मामले में विशेषज्ञों से राय ली जा रही है कि इन्हें समाजशास्त्र या मनोविज्ञान से स्नातक माना जाएगा या नहीं।