...और अखिलेश के सामने बेबस हो गया विपक्ष
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अखिलेश की तैयारी ज्यादा पुख्ता थीं। जिससे कि वह विपक्ष पर भारी पड़े। हालांकि विपक्ष ने हर संभव कोशिश की लेकिन वह मुख्यमंत्री को नहीं रोक सका। विपक्ष लगातार हंगामा करता रहा लेकिन अखिलेश ने अपना भाषण पढ़कर ही दम लिया।
विधान परिषद की कार्यवाही लगातार दूसरे दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ गई। विपक्ष ने नियमों को निलंबित करने के बाद प्रश्नप्रहर को स्थगित कर कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर चर्चा कराने के मांग की।
नेता सदन ने इसका विरोध किया। कुछ शब्दों को लेकर नेता प्रतिपक्ष नसीमुद्दीन सिद्दीकी व नेता सदन अहमद हसन के बीच तीखी तू-तू मैं-मैं हुई।
भाजपा नेता हृदयनारायण दीक्षित व नेता सदन में भी तर्क-वितर्क हुए। नेता सदन की राजनीतिक मार्केटिंग करने की टिप्पणी से नाराज विपक्ष तीन बार वेल में आया। सभापति गणेश शंकर पांडेय को दो बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
हंगामे के बीच पढ़ा गया बजट
बार बार विपक्ष के हंगामे के कारण नेता सदन अहमद हसन से यह तक कहना पड़ा कि वह विषयान्तर कर रहे हैं।
हंगामा न थमने पर सभापति ने शोरशराबे के बीच ही वर्ष 2014-15 का प्रदेश का बजट प्रस्तुत कराकर सदन की कार्यवाही सोमवार सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी।
शुक्रवार को सदन की कार्यवाही प्रारंभ होते ही नेता प्रतिपक्ष नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने सभापति से कानून-व्यवस्था पर चर्चा कराने की मांग की।
उन्होंने कहा कि प्रदेश जल रहा है। इसलिए प्रश्नप्रहर स्थगित करके चर्चा करा ली जाए।
भाजपा पर लगा मार्केटिंग का आरोप
भाजपा नेता हृदयनारायण दीक्षित ने भी प्रश्नप्रहर स्थगित करने का आग्रह किया। इस पर नेता सदन अहमद हसन ने विरोध किया। आरोप लगाया कि विपक्ष नियमों को खत्म कर देना चाहता है।
नेता प्रतिपक्ष और भाजपा के नेता ने इस पर नाराजगी जताई। कहा कि वह नियमों को निलंबित करने की बात कर रहे हैं, खत्म करने की नहीं।
नेता सदन ने आरोप लगाया कि विपक्ष राजनीतिक मार्केटिंग कर रहा है। छपने के लिए इस तरह की बात कर रहा है।
इससे नाराज बसपा, भाजपा, कांग्रेस और रालोद के सदस्य सभापति के आसन के सामने आकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। जिससे सभापति ने कार्यवाही 11.30 बजे तक स्थगित कर दी।
इस बात पर हुआ हंगामा
दोबारा सदन बैठा तो नेता प्रतिपक्ष ने फिर सभापति से कानून-व्यवस्था पर चर्चा कराने का आग्रह किया। साथ ही कहा नेता सदन हमेशा कुछ न कुछ इस तरह की बात बोलते हैं, जिससे सदन न चल पाए।
आरोप लगाते हैं कि विपक्ष छपने के लिए बोलता है। खुद ऐसा करते हैं। ऊपर वाला इन्हें (सत्तापक्ष को) सद्बुद्धि दे। इस पर सत्तापक्ष के नरेश उत्तम और एक अन्य सदस्य विरोध में खड़े हो गए।
नेता प्रतिपक्ष की बात को असंसदीय करार दिया। सपा व बसपा के सदस्यों में तकरार शुरू हो गई और बसपा के सदस्य वेल में आ गए। सभापति ने जैसे-तैसे सभी को उनके आसन पर भेजा।
उलझ गए नेता प्रतिपक्ष
नेता सदन ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने उनको लेकर व्यक्तिगत टिप्पणी की है। यह अशोभनीय है। नेता प्रतिपक्ष बोले कि उन्होंने कुछ भी अशोभनीय नहीं कहा है। सभापति देख लें, अगर उन्हें लगता है तो वह अपने शब्द भी वापस ले लेंगे और खेद भी जताएंगे।
पर, कम से कम नेता सदन विपक्ष पर छपने के लिए बोलने का आरोप न लगाएं। यहां लक्ष्मण-परशुराम संवाद नहीं हो रहा है। भाजपा के दीक्षित ने कहा कि सपा सरकार भले ही एक परिवार की सेवा में हो परंतु सदस्य छपने के लिए जनता की सेवा को सदन में बोलते हैं।
इसी बीच नेता सदन फिर राजनीतिक मार्केटिंग की बात करने लगे। सभापति को कहना पड़ा कि विपक्ष सहयोग कर रहा है लेकिन आप विषयान्तर कर रहे हैं। नेता सदन की बातों को लेकर विपक्ष फिर वेल में आ गया। सभापति ने दूसरी बार 12.20 बजे तक कार्यवाही स्थगित कर दी।
तीसरी बार कार्यवाही शुरू हुई तो फिर शोरशराबा होने लगा। आखिरकार सभापति ने शोरशराबे के बीच ही नेता सदन से चालू वित्तीय वर्ष का बजट प्रस्तुत कराकर कार्यवाही को सोमवार पूर्वाह्न 11 बजे तक स्थगित कर दिया।