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आईईटी में जल पुरुष राजेंद्र सिंह का व्याख्यान

Wed, 16 Oct 2019 01:45 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 16 Oct 2019 01:45 AM IST
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only 28 percent water remain in india
देश में बचा है सिर्फ 28% पानी
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आईईटी में जल पुरुष राजेंद्र सिंह का व्याख्यान, युवाओं से जल संरक्षण में सहयोग का आह्वान
जल दोहन की तकनीक जर्मनी के पास आज से 200 साल पहले से थी। मगर उन्होंने इस तकनीक का उपयोग नहीं किया। हमारे पास यह तकनीक 90 साल पहले आई और हमने जल का मनमाना दोहन शुरू कर दिया। आज हालत यह है कि इतने कम समय में हमने अपने 72 फीसदी जलस्रोतों का प्रयोग कर लिया है। अब हमारे पास 28 फीसदी पानी ही बचा है। यह कहना है जल पुरुष राजेंद्र सिंह का। वे एकेटीयू के घटक संस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आईईटी) के पंडित रामप्रसाद बिस्मिल सभागार में विशेषज्ञ व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने तकनीकी शिक्षा के छात्रों का आह्वान किया कि वे पानी रिचार्ज के लिए काम करें।
भारत रत्न एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती पर आयोजित ‘जल संरक्षण : चुनौतियां और तकनीकी समाधन’ विषयक व्याख्यान में उन्होंने कहा कि इस समय हम वैश्विक तकनीक का प्रयोग कर रहे हैं जो कि स्रोतों के दोहन पर आधारित है। हमें अपनी भौगोलिक स्थितियों के अनुरूप पौराणिक तकनीकों का प्रयोग करके जल संचयन के माध्यम से जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने की जरूरत है। उन्होंने राजस्थान का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 11,800 जल स्रोतों को विकसित करके काफी जलकूपों को पुनर्जीवित करने की पहल की गई। इससे वहां के निवासियों की पानी की समस्या समाप्त हो गई। राजेंद्र सिंह ने कहा है कि सतत विकास असल में सनातन विकास है, जो कि विकास की एक भारतीय पद्धति है। यदि हमें ज्ञान गुरु बनना है तो हमें अपनी पौराणिक तकनीकी को पुनर्जीवित करना होगा।
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जल संरक्षण पर काम के लिए छात्रों को देंगे अनुदान
इस अवसर पर एकेटीयू कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि यदि आईईटी के विद्यार्थी जल पुरुष के साथ मिलकर पानी संरक्षण के लिए प्रोजेक्ट व शोध करेंगे तो विश्वविद्यालय उन्हें अनुदान और अन्य सहायता प्रदान करेगा। इस अवसर पर आईईटी निदेशक प्रो. एचके पालीवाल, कैस के निदेशक प्रो. मनीष गौड़, नोएडा इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रो. वीरेंद्र पाठक, आईईटी रजिस्ट्रार प्रदीप बाजपेई, दिनेश पाठक व काफी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।
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