नए सत्र में नई सुविधाएं, ऑनलाइन कर सकेंगे माइग्रेशन व प्रॉविजनल सार्टिफिकेट के आवेदन
लखनऊ विश्वविद्यालय में नए सत्र की शुरुआत पर छात्र-छात्राओं को नई सुविधाओं का तोहफा देने की तैयारी है। एक तरफ जहां छात्रों को ऑनलाइन ही माइग्रेशन और प्रॉविजनल सर्टिफिकेट देने की तैयारी हो रही है, वहीं विवि से संबंधित किसी भी तरह का शुल्क कहीं से भी ऑनलाइन या चालान के माध्यम से जमा किया जा सकेगा।
इतना ही नहीं जो छात्र-छात्राएं सूचना का अधिकार के तहत कॉपियां देखना चाहेंगे वह भी ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इसके साथ में प्रयास यह भी है कि स्टूडेंट्स को उनकी कॉपी ई-मेल आईडी पर ही स्कैन करके भेज दी जाए।
विवि में काफी समय से माइग्रेशन और प्रॉविजनल सर्टिफिकेट्स को ऑनलाइन उपलब्ध कराने की प्रयास चल रहा है। पिछले दिनों राज्यपाल व प्रमुख सचिव के साथ विभिन्न बैठकों में भी राज्य विवि के कुलपतियों को बोला गया कि वह तकनीक का प्रयोग बढ़ाकर जितना अधिक संभव हो ऑनलाइन सुविधाएं देना शुरू करें।
विवि अपनी प्रवेश और परीक्षा फॉर्म भरवाने की प्रणाली को ऑनलाइन कर चुका है। इसके अलावा अब इंटरनेट पर मार्क्सशीट भी उपलब्ध है। इसी क्रम में विवि माइग्रेशन और प्रॉविजनल सर्टिफिकेट भी ऑनलाइन उपलब्ध कराने जा रहा है।
परीक्षा नियंत्रक एसके शुक्ला ने बताया कि यह काम किसी भी हाल में 30 जून तक पूरा कर लिया जाएगा। एक जुलाई से यह व्यवस्था मिलने लगेगी। उन्होंने बताया कि छात्र-छात्राएं वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरेंगे।
ऑनलाइन ही उत्तर पुस्तिका देखने के लिए जमा कर सकेंगे शुल्क
संबंधित शुल्क जमा करने के लिए डेबिट या क्रेडिट कार्ड के साथ ही चालान फॉर्म की भी सुविधा होगी। आवेदन के समय उनको विभिन्न विकल्प मिलेंगे।
जैसे वह खुद विवि आकर अपना माइग्रेशन या प्रॉविजनल लेंगे या इन सर्टिफिकेट की डिजिटल कॉपी अरजेंट चाहते हैं और मूल प्रति बाद में आकर लेंगे या मूल प्रति डाक के माध्यम से प्राप्त करना चाहते हैं। यदि कोई डाक के माध्यम से इनकी प्रति मांगेगा तो उससे आवेदन शुल्क के साथ डाक सेवा का शुल्क लिया जाएगा।
इस व्यवस्था के लागू होने से आवेदकों की दौड़ भाग बचेगी। खास तौर से जो शहर या अन्य राज्यों से सिर्फ इन डॉक्यूमेंट के लिए आते हैं।
डिजिटलाइजेशन के क्रम में परीक्षा विभाग इस बार ई-मेल पर ही सूचना का अधिकार के तहत मांगी गई उत्तर पुस्तिकाएं भेजने की तैयारी भी कर रहा है।
परीक्षा नियंत्रक एसके शुक्ला ने बताया कि उत्तर पुस्तिकाएं देखने के लिए पहले छात्र को आवेदन करने विवि आना पड़ता है। इसके बाद उसे कॉपी दिखाने की तिथि दी जाती है, तो उसे फिर विवि आना होता है। नई व्यवस्था में छात्र ऑनलाइन ही उत्तर पुस्तिका देखने के लिए आवेदन शुल्क जमा कर देंगे।
इसके बाद उनकी उत्तर पुस्तिका स्कैन करके ई-मेल पर उपलब्ध करा दी जाएगी। इससे उन्हें विवि की भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी। उन्होंने बताया कि यह व्यवस्था तो मई अंत या जून प्रथम सप्ताह में ही लागू करने का प्रयास है।
शुल्क जमा करने से संबंधित नया सॉफ्टवेयर तैयार
जिससे रिजल्ट आना शुरू होते ही छात्रों को सुविधा मिल सके। मालूम हो कि गत वर्ष करीब दो हजार छात्र-छात्राओं ने उत्तर पुस्तिकाएं देखने का आवेदन किया था।
विवि का वित्त विभाग भी नए सत्र में छात्रों को राहत देने जा रहा है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार विवि का शुल्क जमा करने से संबंधित नया सॉफ्टवेयर तैयार हो गया है। दो-तीन दिन में कुलपति प्रो. एसबी निमसे के सामने इसका प्रजेंटेशन होगा।
इसके इस्तेमाल के बाद विवि से संबंधित किसी भी शुल्क का भुगतान कहीं से भी ऑनलाइन किया जा सकेगा। वर्तमान में कैशियर काउंटर पर मैनुअल फीस जमा करने में कई सीमाएं हैं। जैसे काउंटर खुलने व बंद होने में समय की बाध्यता, शुल्क जमा करने के लिए विवि तक आना, काउंटर पर लंबी लाइन लगना आदि।
ऑनलाइन शुल्क जमा की सुविधा के बाद इन समस्याओं से मुक्ति मिल जाएगी। ऑनलाइन फीस जमा करने के अतिरिक्त चालान के माध्यम से कहीं से भी बैंक में शुल्क जमा करने की व्यवस्था हो सकती है।