सरकारी एंबुलेंस न मिलने से लड़खड़ाईं आपातकालीन सेवाएं, होमगार्ड की मौत, हड़ताल वापस ली
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सरकारी एंबुलेंस सेवा 108 और 102 के कर्मचारियों की हड़ताल से सोमवार को दिनभर आपातकालीन सेवाएं लड़खड़ा गईं। एंबुलेंस न मिलने से एक मरीज को समय पर इलाज नहीं मिल पाया, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके अलावा सैकड़ों मरीज एंबुलेंस के लिए कॉल सेंटर पर फोन करते रहे, पर उन्हें निराशा ही हाथ लगी। हालांकि, देर शाम कर्मचारियों ने हड़ताल वापस ले ली।
बक्शी का तालाब में तैनात होमगार्ड जसवंत को दोपहर पौने दो बजे सीने में अचानक दर्द उठा। सहकर्मी उन्हें राम सागर मिश्र अस्पताल ले गए। डॉक्टरों ने हार्ट अटैक पड़ने की बात कहकर केजीएमयू लॉरी रेफर कर दिया। इस पर तीमारदारों ने 108 पर कॉल कर एंबुलेंस मांगी।
कर्मचारियों ने जल्द एंबुलेंस मिलने का आश्वासन दिया। आधे घंटे के बाद भी एंबुलेंस नहीं आई तो तीमारदार निजी एंबुलेंस लेने गए। इसी बीच मरीज ने अस्पताल में ही दम तोड़ दिया। नाराज परिवारीजनों का कहना था कि अगर समय पर एंबुलेंस मिल जाती तो शायद मरीज की जान बच जाती।
एस्मा लगा होने के बाद भी हड़ताल
सरकार की ओर से आपातकालीन सेवाएं बाधित करने पर एस्मा लगाने के बाद भी कर्मचारियों ने एंबुलेंस के पहिये जाम कर दिए। इस कारण तीमारदार निजी एंबुलेंस से मरीजों को लेकर अस्पताल पहुंचते रहे।
ई-रिक्शा तो कोई टेंपो से पहुंचा
कॉल सेंटर पर फोन करने के घंटों बाद भी एंबुलेंस न मिली तो तीमारदार मजबूरी में मरीजों को ई-रिक्शा या टेंपो में लादकर अस्पताल पहुंचे। गुडंबा के कुर्सी रोड निवासी अर्जुन दोपहर दो बजे पत्नी को ई-रिक्शा से लेकर पहुंचे थे। इसी तरह मोहनलालगंज से महिला को टेंपो में लेकर तीमारदार सिविल अस्पताल आए।
इस दौरान मरीज की हालत बिगड़ गई थी। आनन-फानन उन्हें ऑक्सीजन स्पोर्ट पर रखा गया। उधर, डफरिन-झलकारीबाई अस्पताल में भी तीमारदार अपने वाहन व निजी एंबुलेंस से गर्भवती महिलाओं को लेकर पहुंचे।
जीवीकेईएमआरआई के प्रवक्ता सुनील यादव का कहना है कि मरीज की मौत के बारे में जानकारी नहीं है। शाम को प्रबंधन से वार्ता के बाद एंबुलेंस कर्मचारियों ने हड़ताल वापस ले ली है। 108 व 102 सेवाएं पहले की तरह बहाल हो गई है।