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पुरानी कारों के कारोबारी भी भरेंगे जीएसटी, कराना होगा पंजीकरण
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
Updated Thu, 13 Jul 2017 12:31 PM IST
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पुरानी कारें खरीदने-बेचने का कारोबार करने वाले भी जीएसटी के दायरे में आ गये हैं। इन पर अब तक कोई टैक्स नहीं लगता था। लेकिन अब इन्हें भी ट्रेडर्स के रूप में पंजीकरण कराना होगा।
यह बातें जॉइंट कमिश्नर (जीएसटी) संजय पाठक ने कारोबारियों के सवाल के जवाब में कहीं। लखनऊ में पुरानी कार बेचने वाले कारोबारी शारिक जीएसटी लगने के बाद से काफी परेशान थे।
उन्हें यह पता नहीं चल पा रहा था कि उन्हें जीएसटी में पंजीकरण कराना है या नहीं। शारिक ने अपनी समस्या उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल के शिविर में बताई तो संगठन के अध्यक्ष संजय गुप्ता ने जॉइंट कमिश्नर संजय पाठक के सामने यह सवाल उठाया।
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जिस पर जॉइंट कमिश्नर ने कहा कि पुरानी कार बेचना व्यापार की श्रेणी में आता है। इसलिए पुरानी कार खरीदने बेचने वालों को भी जीएसटी में पंजीकरण कराना होगा। पुरानी कारों पर पांच से 18 फीसदी तक जीएसटी का प्रावधान है।
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यह बातें जॉइंट कमिश्नर (जीएसटी) संजय पाठक ने कारोबारियों के सवाल के जवाब में कहीं। लखनऊ में पुरानी कार बेचने वाले कारोबारी शारिक जीएसटी लगने के बाद से काफी परेशान थे।
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उन्हें यह पता नहीं चल पा रहा था कि उन्हें जीएसटी में पंजीकरण कराना है या नहीं। शारिक ने अपनी समस्या उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल के शिविर में बताई तो संगठन के अध्यक्ष संजय गुप्ता ने जॉइंट कमिश्नर संजय पाठक के सामने यह सवाल उठाया।
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जिस पर जॉइंट कमिश्नर ने कहा कि पुरानी कार बेचना व्यापार की श्रेणी में आता है। इसलिए पुरानी कार खरीदने बेचने वालों को भी जीएसटी में पंजीकरण कराना होगा। पुरानी कारों पर पांच से 18 फीसदी तक जीएसटी का प्रावधान है।
माइग्रेशन में हो रही दिक्कत
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वहीं जीएसटी में उन व्यापारियों को बड़ी दिक्कत होगी जो एडवांस रकम लेकर समय से माल की सप्लाई नहीं करते हैं। जीएसटी में वह डिफॉल्टर साबित होंगे। वाणिज्य कर अफसरों के मुताबिक जीएसटी में एडवांस में रकम लेने पर 30 दिन में माल की सप्लाई करना अनिवार्य होगा।
व्यापारी ऐसा नहीं करता है तो एडवांस ली गई रकम से जीएसटी डिपॉजिट करना पड़ेगा। समय से माल की सप्लाई न करने पर जीएसटी पोर्टल पर डिफॉल्टर के रूप में उसकी पहचान हो जाएगी।
जीएसटी पोर्टल पर व्यापारियों को माइग्रेशन में दिक्कत हो रही है। बैंक में स्टेशनरी की सप्लाई करने वाली नेहा ने इस बारे में जीएसटी एक्सपर्ट डॉ. शिव आसरे सिंह को मोबाइल पर बताया।
माइग्रेशन का पार्ट ‘ए’ भरने के बाद जैसे ही पार्ट ‘बी’ भरना शुरू करते हैं सिस्टम हैंग करने लगता है। कई बार कोशिश के बाद भी नेहा माइग्रेशन नहीं कर सकीं। जीएसटी एक्सपर्ट ने इस समस्या के बारे में उच्च अफसरों को अवगत कराने का आश्वासन दिया।
व्यापारी ऐसा नहीं करता है तो एडवांस ली गई रकम से जीएसटी डिपॉजिट करना पड़ेगा। समय से माल की सप्लाई न करने पर जीएसटी पोर्टल पर डिफॉल्टर के रूप में उसकी पहचान हो जाएगी।
जीएसटी पोर्टल पर व्यापारियों को माइग्रेशन में दिक्कत हो रही है। बैंक में स्टेशनरी की सप्लाई करने वाली नेहा ने इस बारे में जीएसटी एक्सपर्ट डॉ. शिव आसरे सिंह को मोबाइल पर बताया।
माइग्रेशन का पार्ट ‘ए’ भरने के बाद जैसे ही पार्ट ‘बी’ भरना शुरू करते हैं सिस्टम हैंग करने लगता है। कई बार कोशिश के बाद भी नेहा माइग्रेशन नहीं कर सकीं। जीएसटी एक्सपर्ट ने इस समस्या के बारे में उच्च अफसरों को अवगत कराने का आश्वासन दिया।