अब गली-मोहल्लों में नहीं होंगे एग्जाम सेंटर
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एसएससी की 21 अक्तूबर को आयोजित हुई परीक्षा में लखनऊ के बाहरी छोर पर स्थित स्कूलों को परीक्षा केंद्र बनाया गया था।
इसकी वजह से दूसरे शहरों से परीक्षा देने आए बहुत से अभ्यर्थी अपना परीक्षा केंद्र ढूंढ नहीं पाए।
इसके चलते उनकी परीक्षा छूट गई। राजधानी में 27 अक्तूबर को आयोजित हुई एसएससी की परीक्षा में मोबाइल से नकल करते और दूसरे अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देते हुए युवकों को पकड़ा गया।
आरोपियों को जहां से पकड़ा गया, वे सेंटर गली-मोहल्लों में स्थित थे। दोनों मामलों एक बात कॉमन यह थी कि परीक्षा किसी नामी स्कूल के बजाय छोटे स्कूलों में आयोजित हुई थी।
गली-मोहल्लों के स्कूलों में परीक्षा केंद्र बनाने के बाद आमतौर पर ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अब ऐसी समस्याओं को दूर करने के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक ने अपने स्तर से तैयारी शुरू की है।
जिला स्तर पर 126 राजकीय, अनुदानित और प्रतिष्ठित वित्तविहीन स्कूलों की सूची तैयार की गई है। इस सूची को मंडलायुक्त से अनुमोदित भी कराया जाएगा। इसके बाद प्रतियोगी परीक्षा के लिए इन स्कूलों में सेंटर बनाए जाएंगे।
कर्मचारी चयन आयोग या दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं के परीक्षा केंद्र निर्धारण की जिम्मेदारी जिला प्रशासन को करनी होती है। जिला प्रशासन परीक्षा केंद्रों के निर्धारण का दायित्व डीआईओएस कार्यालय को सौंप देता है।
कुछ विभाग अपने स्तर पर ही परीक्षा केंद्रों का निर्धारण करने के लिए स्कूलों से सीधे संपर्क कर लेते हैं। परीक्षा केंद्र पर कक्ष निरीक्षक की ड्यूटी में कॉलेज के शिक्षकों को ही लगाया जाता है।
परीक्षा केंद्र बनाने पर केंद्र व्यवस्थापक और कक्ष निरीक्षकों को पारिश्रमिक का भुगतान किया जाता है। ज्यादातर प्रतियोगी परीक्षाएं छुट्टी के दिन होती हैं। इससे कॉलेज प्रबंधकों और शिक्षक दोनों को आर्थिक फायदा मिल जाता है।
इस वजह से गली-कूचों में स्थित स्कूल भी खुद को परीक्षा केंद्र बनवाने के लिए जुगाड़ में जुटे रहते हैं। लेकिन अब जिला विद्यालय निरीक्षक ने अच्छी छवि वाले 126 कॉलेजों की सूची तैयार की गई है।
सूची में शमिल स्कूलों में एक दिन में करीब 75 हजार अभ्यर्थियों की परीक्षा कराई जा सकती है। सूची में सबसे पहले राजकीय उसके बाद अनुदानित और सबसे बाद में अच्छी छवि वाले वित्तविहीन विद्यालयों के नाम शामिल हैं।
इसमें भी शर्त यह होगी कि अगर सूची में शामिल राजकीय कॉलेज परीक्षा के लिए उपलब्ध हैं, तो सबसे पहले उसी में परीक्षा करवाई जाएगी।
इसके बाद जरूरत पड़ी तो अनुदानित और वित्तविहीन विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया जाएगा। दीपावली के बाद इस पर मंडलायुक्त की संस्तुति ली जाएगी।