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पीडब्ल्यूडी में करोड़ों के सड़क घोटाले में बदले गए जांच अधिकारी, अब कड़क अफसर को तफ्तीश
Tue, 23 Apr 2019 12:01 AM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Tue, 23 Apr 2019 12:01 AM IST
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घोटाला
- फोटो : amar ujala
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बस्ती में हुए करोड़ों रुपये के सड़क घोटाले के जांच अधिकारी बदल दिए गए हैं। पहले उसी मुख्य अभियंता को जांच दी गई थी, जिसके कार्यकाल में यह घपला हुआ था। अमर उजाला में यह मामला उजागर होने के बाद शासन ने अपना फैसला बदल दिया है।
अब कड़क छवि के माने जाने वाले प्रमुख अभियंता (ग्रामीण सड़क) आरसी बरनवाल को जांच सौंपी गई है। इस मामले में पीडब्ल्यूडी के कानपुर जोन के मुख्य अभियंता दिवाकर शुक्ला के खिलाफ भी जांच होगी।
दरअसल, वर्ष 2017-18 और 2018-19 में बस्ती में 300 से ज्यादा सड़कों के निर्माण के लिए रकम दी गई थी। लेकिन मौके पर जब काम नहीं हुआ तो स्थानीय विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की।
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अब कड़क छवि के माने जाने वाले प्रमुख अभियंता (ग्रामीण सड़क) आरसी बरनवाल को जांच सौंपी गई है। इस मामले में पीडब्ल्यूडी के कानपुर जोन के मुख्य अभियंता दिवाकर शुक्ला के खिलाफ भी जांच होगी।
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दरअसल, वर्ष 2017-18 और 2018-19 में बस्ती में 300 से ज्यादा सड़कों के निर्माण के लिए रकम दी गई थी। लेकिन मौके पर जब काम नहीं हुआ तो स्थानीय विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की।
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प्रारंभिक जांच में ये गड़बड़ियां बस्ती के प्रांतीय खंड, पीडब्ल्यूडी के अधीन आने वाले क्षेत्र में मिलीं। मुख्यालय ने अधीक्षण अभियंता शशि भूषण की अध्यक्षता में जांच टीम का गठन किया। इस टीम ने जांच में करीब 40 करोड़ का फंड डायवर्जन (एक मद का दूसरे मद में खर्च करना) बताया। साथ ही गबन की आशंका जताई।
इसके लिए प्रांतीय खंड के तत्कालीन एक्सईएन आलोक रमण को जिम्मेदार ठहराते हुए मामले की गहन जांच की सिफारिश की गई। इस आधार पर तत्काल आलोक के खिलाफ जांच के आदेश देते हुए उन्हें सस्पेंड भी कर दिया गया। शासन ने इस मामले में आगे की जांच गोरखपुर मंडल के मुख्य अभियंता एसपी सक्सेना को सौंप दी।
इसके लिए प्रांतीय खंड के तत्कालीन एक्सईएन आलोक रमण को जिम्मेदार ठहराते हुए मामले की गहन जांच की सिफारिश की गई। इस आधार पर तत्काल आलोक के खिलाफ जांच के आदेश देते हुए उन्हें सस्पेंड भी कर दिया गया। शासन ने इस मामले में आगे की जांच गोरखपुर मंडल के मुख्य अभियंता एसपी सक्सेना को सौंप दी।
बता दें कि इस घपले को वित्त वर्ष 2017-18 और उससे अगले वित्त वर्ष के 1 अप्रैल से 31 जुलाई 2018 के मध्य अंजाम दिया गया था। 1 अप्रैल से 30 जुलाई 2018 तक बस्ती का चार्ज भी मुख्य अभियंता एसपी सक्सेना के ही पास था। नियमानुसार, उन्हें जांच नहीं सौंपी जा सकती थी।
इस प्रकरण को 12 अप्रैल के अंक में अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद शासन ने पीडब्ल्यूडी मुख्यालय से रिपोर्ट तलब की। रिपोर्ट में बताया गया कि अमर उजाला में प्रकाशित तथ्य सत्य हैं। इसके बाद शासन ने जांच प्रमुख अभियंता, ग्रामीण सड़क आरसी बरनवाल को दे दी है।
जिस समय यह घपला हुआ था, उस समय बस्ती के अधीक्षण अभियंता दिवाकर शुक्ला थे। वर्तमान में वे प्रमोशन पाकर मुख्य अभियंता, कानपुर के पद पर तैनात हैं। इसलिए शुक्ला को भी जांच के दायरे में लाने के आदेश दिए गए हैं।
इस प्रकरण को 12 अप्रैल के अंक में अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद शासन ने पीडब्ल्यूडी मुख्यालय से रिपोर्ट तलब की। रिपोर्ट में बताया गया कि अमर उजाला में प्रकाशित तथ्य सत्य हैं। इसके बाद शासन ने जांच प्रमुख अभियंता, ग्रामीण सड़क आरसी बरनवाल को दे दी है।
जिस समय यह घपला हुआ था, उस समय बस्ती के अधीक्षण अभियंता दिवाकर शुक्ला थे। वर्तमान में वे प्रमोशन पाकर मुख्य अभियंता, कानपुर के पद पर तैनात हैं। इसलिए शुक्ला को भी जांच के दायरे में लाने के आदेश दिए गए हैं।