शिक्षकों के वेतन से एनपीएस की कटौती अब जरूरी
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बेसिक शिक्षा परिषद ने एक अप्रैल 2005 या उसके बाद नियुक्त शिक्षकों के वेतन में से न्यू पेंशन स्कीम के तहत कटौती अनिवार्य कर दी है। मार्च में मिलने वाली फरवरी की तनख्वाह से यह कटौती करनी होगी।
ऐसा न करने वाले जिला वित्त एवं लेखाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। प्रदेश में एक अप्रैल 2005 या उसके बाद नियुक्त शिक्षकों को पुरानी पेंशन का लाभ नहीं मिलता है, इसलिए उन्हें न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) के तहत लाने का फैसला किया गया है।
यह योजना अप्रैल 2016 से लागू होनी थी लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के चलते अभी तक लागू नहीं हो सकी है। वहीं योजना का लाभ न मिलने से शिक्षकों में काफी रोष है।
उनका कहना है कि शिक्षकों के वेतन से पेंशन मद में कटौती न होने से उनका भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है।
फरवरी से ही दिए गए थे आदेश
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बेसिक शिक्षा परिषद ने फरवरी की तनख्वाह से एनपीएस की कटौती के निर्देश दिए हैं। यानी, मार्च में शिक्षकों को तनख्वाह इस मद की कटौती के बाद ही मिलेगी।
हालांकि, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष दिनेश शर्मा और दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव का कहना है कि अधिकतर जिलों में एनपीएस कटौती के लिए पर्याप्त तैयारी नहीं की गई है।
इसलिए मार्च से योजना का लागू हो पाना मुमकिन नहीं लग रहा है।