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Lucknow News: गर्भाशय कैंसर के ऑपरेशन के लिए अब नहीं लगाना पड़ेगा चीरा
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लखनऊ। केजीएमयू में गर्भाशय कैंसर के ऑपरेशन के लिए अब चीरा नहीं लगाना पड़ेगा। लैप्रोस्कोप विधि से ऑपरेशन के लिए गायनी आंकोलॉजी यूनिट में 1.10 करोड़ रुपये की आधुनिक मशीन खरीदी जाएगी।
कुलपति कार्यालय के बोर्ड रूम में बृहस्पतिवार को 70वीं फाइनेंस व हाई लेवल पर्चेज कमेटी की बैठक में लैप्रोस्कोप खरीदने का फैसला लिया गया। संस्थान में अभी गर्भाशय कैंसर का इलाज ओपेन सर्जरी से होता है। लैप्रोस्कोप से ऑपरेशन के दौरान खास प्रकार की दवा डाली जाती है, जिससे कैंसर संक्रमित लिम्फोनड की पहचान कर उसे निकाला जा सकता है।
अभी सभी लिम्फोनड निकालने पड़ते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि लैप्रोस्कोप से ऑपरेशन अधिक सुरक्षित है। इसमें रक्तस्राव व संक्रमण की आशंका कम होती है। वहीं, मरीज जल्द डिस्चार्ज भी हो जाता है।
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लारी कॉर्डियोलॉजी में दिल के मरीजों के लिए दो और कैथलैब खरीदी जाएगी। इनकी लागत दो करोड़ रुपये आएगी। अभी विभाग में चार कैथ लैब हैं। नई कैथलैब नए भवन के लिए खरीदी जाएंगी। केजीएमयू लखनऊ का पहला सरकारी संस्थान बन जाएगा, जहां छह कैथलैब होंगी।
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कुलपति कार्यालय के बोर्ड रूम में बृहस्पतिवार को 70वीं फाइनेंस व हाई लेवल पर्चेज कमेटी की बैठक में लैप्रोस्कोप खरीदने का फैसला लिया गया। संस्थान में अभी गर्भाशय कैंसर का इलाज ओपेन सर्जरी से होता है। लैप्रोस्कोप से ऑपरेशन के दौरान खास प्रकार की दवा डाली जाती है, जिससे कैंसर संक्रमित लिम्फोनड की पहचान कर उसे निकाला जा सकता है।
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अभी सभी लिम्फोनड निकालने पड़ते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि लैप्रोस्कोप से ऑपरेशन अधिक सुरक्षित है। इसमें रक्तस्राव व संक्रमण की आशंका कम होती है। वहीं, मरीज जल्द डिस्चार्ज भी हो जाता है।
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लारी कॉर्डियोलॉजी में दिल के मरीजों के लिए दो और कैथलैब खरीदी जाएगी। इनकी लागत दो करोड़ रुपये आएगी। अभी विभाग में चार कैथ लैब हैं। नई कैथलैब नए भवन के लिए खरीदी जाएंगी। केजीएमयू लखनऊ का पहला सरकारी संस्थान बन जाएगा, जहां छह कैथलैब होंगी।