शराब की दुकानों में SC-ST को आरक्षण नहीं
शासन ने शराब की दुकानों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं विमुक्त जातियों के लिए आरक्षण का प्रावधान करने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
विधानमंडल की समिति ने सरकार से शराब की दुकानों के आवंटन में इन जातियों के लिए आरक्षण का प्रावधान करने की सिफारिश की थी।
सरकार ने यह कहते हुए इससे इन्कार कर दिया है कि यह व्यावहारिक, सामाजिक व संवैधानिक दृष्टि से तथा प्रदेश के राजस्वहित में औचित्यपूर्ण नहीं है।
प्रदेश विधानमंडल की अनुसूचित जातियों, जनजातियों एवं विमुक्त जातियों संबंधी संयुक्त समिति ने शराब की दुकानों में इन जातियों के लिए आरक्षण का प्रावधान करने की सिफारिश की थी।
नीलामी की प्रक्रिया भी एक कारण
पूर्व में आबकारी विभाग ने यह तर्क देते हुए इसे मानने में असमर्थता जता दी थी कि दुकानों का आवंटन नीलामी के जरिये होता है। यह प्रदेश के राजस्व का सबसे बड़ा स्रोत है।
दुकानों में आरक्षण का प्रावधान किसी भी लिहाज से उचित नहीं है। संयुक्त समिति की बीते साल 29 मई को हुई बैठक में आरक्षण व्यवस्था लागू करने के संबंध में शासन से पुन: विचार करने की अपेक्षा की गई।
आबकारी आयुक्त ने नवंबर में यह मामला शासन को संदर्भित करते हुए इस बारे में दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध दिया।
शासन ने इस पर गहनता से विचार करने के बाद निर्णय किया है कि शराब की दुकानों में अनुसूचित जाति, जनजाति एवं विमुक्त जाति अथवा किसी अन्य को आरक्षण देना औचित्यपूर्ण प्रतीत नहीं होता। शासन की ओर से इस संबंध में आदेश जारी करके आबकारी आयुक्त को सूचित कर दिया गया है।