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Lucknow News: अब कृत्रिम अंग भी बनाएगा पुनर्वास विवि
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लखनऊ। दिव्यांग विद्यार्थी आत्मनिर्भर बनकर दूसरों की भी मदद कर सकें इसके लिए डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय ने बड़ी पहल की है। अब यहां दिव्यांगों के लिए कृत्रिम अंग भी बनाए जाएंगे। खास बात है कि इन्हें बनाने में विद्यार्थियों का भी सहारा लिया जाएगा, जिससे उनका प्रशिक्षण बेहतर होगा।
नए सत्र से इस पहल की शुरुआत होगी। इस संबंध में सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सिपेट) से सहमति मिल गई है। महीने के आखिरी सप्ताह में होने वाली बैठक में औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। विश्वविद्यालय के कृत्रिम अंग एवं पुनर्वास केंद्र की ओर से दिव्यांगजनों को निशुल्क कृत्रिम अंग दिए जाते हैं। इनमें से करीब 50 प्रतिशत अंग बाहर से खरीदे जाते हैं। अब इन्हें विश्वविद्यालय में ही बनाया जाएगा। इस पहल से एमपीओ और बीपीओ पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को सबसे अधिक फायदा होगा। ये डिजिटल तकनीक के माध्यम से आधुनिक कृत्रिम अंग तैयार कर सकेंगे।
बाजार से बेहतर होगी गुणवत्ता
विश्वविद्यालय में बाजार से बेहतर गुणवत्ता के कृत्रिम अंग बनाने की योजना है। इन्हें जरूरतमंद आसानी से इस्तेमाल कर सकेंगे। विवि के अधिकारियों ने बताया कि सुविधाजनक अंग बनाने पर अध्ययन होगा। आने वाले दिनों में बाहरी जरूरतमंदों को भी यहीं के बने अंग उपलब्ध कराए जाएंगे।
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कोट.......
औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के कगार पर है। माह के अंतिम सप्ताह में बैठक होनी है। नए सत्र से विद्यार्थियों को पहल का लाभ मिलना शुरू होगा।
- प्रो. यशवंत वीरोदय प्रवक्ता पुनर्वास विश्वविद्यालय
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नए सत्र से इस पहल की शुरुआत होगी। इस संबंध में सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सिपेट) से सहमति मिल गई है। महीने के आखिरी सप्ताह में होने वाली बैठक में औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। विश्वविद्यालय के कृत्रिम अंग एवं पुनर्वास केंद्र की ओर से दिव्यांगजनों को निशुल्क कृत्रिम अंग दिए जाते हैं। इनमें से करीब 50 प्रतिशत अंग बाहर से खरीदे जाते हैं। अब इन्हें विश्वविद्यालय में ही बनाया जाएगा। इस पहल से एमपीओ और बीपीओ पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को सबसे अधिक फायदा होगा। ये डिजिटल तकनीक के माध्यम से आधुनिक कृत्रिम अंग तैयार कर सकेंगे।
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बाजार से बेहतर होगी गुणवत्ता
विश्वविद्यालय में बाजार से बेहतर गुणवत्ता के कृत्रिम अंग बनाने की योजना है। इन्हें जरूरतमंद आसानी से इस्तेमाल कर सकेंगे। विवि के अधिकारियों ने बताया कि सुविधाजनक अंग बनाने पर अध्ययन होगा। आने वाले दिनों में बाहरी जरूरतमंदों को भी यहीं के बने अंग उपलब्ध कराए जाएंगे।
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औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के कगार पर है। माह के अंतिम सप्ताह में बैठक होनी है। नए सत्र से विद्यार्थियों को पहल का लाभ मिलना शुरू होगा।
- प्रो. यशवंत वीरोदय प्रवक्ता पुनर्वास विश्वविद्यालय