यूपीः अब सिर्फ अत्याधुनिक तकनीक के ही स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे
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साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि भविष्य में स्मार्ट मीटर से किसी तरह की छेड़छाड़ की कोई गुंजाइश न रहे और उपभोक्ताओं की बिजली बंद होने जैसी घटना न हो। गौरतलब है कि 12 अगस्त को जन्माष्टमी पर बड़ी संख्या में स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं की बिजली बंद हो गई थी।
ऊर्जा मंत्री ने इस मामले में राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के प्रत्यावेदन को संलग्न करते हुए पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने कहा है कि उपभोक्ताओं को विभिन्न समस्याओं से छुटकारा दिलाने और उच्चतम तकनीक का प्रयोग करने के लिए स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे थे, लेकिन जन्माष्टमी के दिन घटी घटना से उपभोक्ताओं के बीच गलत संदेश गया है।
भविष्य में इसका दोहराव न हो, इसलिए पावर कार्पोरेशन के अध्यक्ष खुद इसकी मॉनिटरिंग करेंगे। कुछ स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं की बिजली 16 अगस्त तक बंद थी और विभाग के संज्ञान में नहीं था। यह कैसी तकनीक है? यह उपभोक्ता हित के मद्देनजर अक्षम्य घटना है।
स्मार्ट मीटर प्रोजेक्ट की खामियों की दी जानकारी
परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने ऊर्जा मंत्री से मिलकर बिजली गुल होने के मुद्दे पर चर्चा की। उन्होंने ऊर्जा मंत्री को स्मार्ट मीटर प्रोजेक्ट की खामियों की विस्तृत जानकारी दी। साथ ही, पुरानी तकनीक के स्मार्ट मीटरों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की।
कहा, इन मीटरों की विश्वसनीयता इसी से समझी जा सकती है कि हजारों स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं की बिजली 16 अगस्त तक चालू नहीं हो पाई थी। दूसरी तरफ ईईएसएल के निदेशक सभी की बिजली चालू हो जाने का दावा कर रहे थे।
जांच में लग सकता है वक्त
जन्माष्टमी के दिन स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं की बिजली गुल होने के मामले की जांच रिपोर्ट आने में थोड़ा वक्त लग सकता है। स्वतंत्रता दिवस और रविवार की छुट्टी होने की वजह से एसटीएफ व मध्यांचल के एमडी की अध्यक्षता वाली कमेटी अभी जांच पूरी नहीं कर सकी है। पावर कॉर्पोरेशन ने सोमवार को राज्य विद्युत नियामक आयोग को जवाब भेजकर इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के लिए और वक्त मांगा है।
एसटीएफ की टीम ने सोमवार को स्मार्ट मीटर कमांड सेंटर जाकर जानकारी ली कि पूरा सिस्टम कैसे संचालित किया जाता है, स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ताओं के मीटरों तथा प्री-पेड बिलों आदि की निगरानी किस तरह होती है। साथ ही जन्माष्टमी के दिन कमांड सेंटर में तैनात अधिकारियों-कर्मचारियों का ब्योरा भी जुटाया।
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी सूर्यपाल गंगवार की अध्यक्षता में गठित चार सदस्यीय समिति भी घटना से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही है। सूत्रों के अनुसार अभी तक यह साफ हो नहीं हो पाया है कि एक साथ इतनी बड़ी संख्या में स्मार्ट मीटरों की बिजली बंद कर देने का कमांड कहां से और किसने दिया?
इस मामले पर राज्य विद्युत नियामक आयोग की ओर से 17 अगस्त तक विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई थी। पावर कॉर्पोरेशन के निदेशक (वाणिज्य) ने आयोग को पत्र भेजकर कहा है कि एसटीएफ व एमडी मध्यांचल की टीम अभी जांच कर रही है। छुट्टियां पड़ जाने की वजह से जांच पूरी नहीं हो पाई है। पॉवर कार्पोरेशन के अध्यक्ष अरविंद कुमार का कहना है कि जांच पूरी होने में दो-तीन दिन और लग सकते हैं। एसटीएफ व एमडी मध्यांचल की रिपोर्ट मिलने के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी।