...और बदल गई गोमती की शक्ल-सूरत
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गोमती के बीरबल साहनी मार्ग स्थित किनारे पर कपड़े धोने गुरुवार सुबह पहुंचे धोबियों ने देखा कि कपड़े पटकने के पत्थरों से किनारे करीब 12-12 फीट दूर जा चुके हैं। सिर्फ यहीं नहीं अग्रसेन घाट के किनारे पर भी गोमती सिमट चुकी थी, लाल पुल में नदी के किनारों पर जमी काई और जलकुंभी पानी निकल जाने की वजह से जमीन पर आ चुकी थे, झूलेलाल पार्क पर विसर्जित पूजन सामग्री भी नदी से बाहर निकल आई है।
यह सब हुआ है एक ओर कुड़िया घाट के निकट नदी पर बनाए गए बंधे की वजह से तो दूसरी ओर बैराज से भी नदी पानी धीरे धीरे लेकिन लगातार निकाला जा रहा है।गोमा में पानी घटने की वजह से नदी के दोनों ओर से किनारे तकरीबन 12-12 फीट घट रहे। गोमती पर बंधा और सफाई सिंचाई विभाग करवा रहा है।
विभाग के एक्सईएन रूप सिंह ने अमर उजाला को बताया कि बंधे का काम बुधवार रात करीब 2 बजे पूरा हो गया था। जिसके बाद नदी में कुड़ियाघाट की ओर नदी का जलस्तर बढ़ने लगा है। इसे निकालने के लिए नदी के किनारे पर ही एक बाइपास कैनाल बनाई गई थी। जिसके जरिए पानी को बहाया जा रहा है। सिंह ने दावा किया कि नदी के सफाई के दौरान यह पानी समस्या नहीं पैदा करेगा क्योंकि बैराज पूरी तरह खोल दिए जाने के बाद सारा पानी बह चुका होगा और फिलहाल करीब 100 मीटर के विस्तार में बह रही गोमती 20 से 30 मीटर में सिमट जाएगी।
बैराज पूरी तरह खोलने में समय
नदी पर बंधा पूरा होने के बाद भी सिंचाई विभाग ने अभी बैराज को पूरी तरह नहीं खोला है। इसे खोलने का समय लगातार आगे बढ़ रहा है। एक्सईएन रूप सिंह ने बताया कि बैराज को पूरी तरह एक साथ नहीं खोला जाएगा। इसे पूरी तरह खोलने में अभी समय लगेगा। दूसरी ओर गुरुवार को दिनभर बैराज से पानी निकलकर बहता रहा। जिससे गोमती लगातार खाली होती गई।
बैराज को पूरी तरह खोलने का समय जैसे जैसे करीब आ रहा है बैराज को लगातार सुधारा जा रहा है। इसे पेंट करके चमकाया गया है तो वहीं मशीनरी को भी सुधारा गया है। पूरे बैराज को उठाने के लिए 11 गीयर बॉक्स हैं। हर गीयर बॉक्स 4 गीयर का है। करीब 30 वर्ष से बैराज की देखरेख कर रहे सिंचाई विभाग के कर्मचारी शमशेर ने बताया कि सभी गीयर बॉक्स की ग्रीसिंग की जा रही है ताकि इसे उठाने में सहूलियत रहे।
बैराज पर गोमा की गहराई करीब 4.70 मीटर मानी जा रही है। इसकी सारसंभाल कर रहे इंजीनियरों ने बताया कि बैराज का सिल लेवल यानी तल का लेवल 110 मीटर है और पॉन्ड लेवल 105 पर है।
कराची से 110 मीटर ऊंची है गोमती
सिंचाई विभाग के इंजीनियरों के मुताबिक गोमती का तल कराची में समुद्र और धरती के मिलने के प्वाइंटर से 110 मीटर ऊंचा है। कराची में बने इस प्वाइंट से ही देश भर में जलनिधियों के तल की ऊंचाई का मापा जाता है। वहीं पॉन्ड लेवल तल से पानी की सतह के बीच की दूरी होती है। गोमती का पॉन्ड लेवल 105 पर निर्धारित रखा जाता है ताकि भारी बारिश के दौरान बाढ़ की स्थितियों को नियंत्रित किया जा सके।
बैराज पर 2 दर्जन से अधिक बंदरों का कब्जा भी है जो यहां सुधार कार्य कर रहे कर्मचारियों को परेशान कर रहे थे। उन्हें दूर रखने के लिए विभाग ने 3 हजार रुपये प्रतिमाह पर एक लंगूर को यहां लगवाया है। इसके मालिक ने बताया कि एक महीने के करीब 3 हजार रुपये उसे मिल रहे हैं और उसका लंगूर ‘राज’ बंदरों को भगाने में एक्सपर्ट है।