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प्रदेश की तर्ज पर हर जिले की जीडीपी की होगी गणना, मुख्यमंत्री ने कार्ययोजना बनाने के दिए निर्देश

Mon, 23 Sep 2019 06:08 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Mon, 23 Sep 2019 06:08 PM IST
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now gdp of every district is calculated like state, cm yogi gives directions
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala
आईआईएम के साथ सरकार के मंत्रियों और अफसरों का मंथन रविवार को ठोस निष्कर्षों के साथ संपन्न हुआ। तय हुआ कि प्रदेश की तर्ज पर अब हर जिले के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की गणना होगी। मुख्यमंत्री ने इसके लिए कार्ययोजना बनाने को कहा है।
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मंथन के समापन अवसर पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य सरकार और आईआईएम के साथ प्रदेश के विकास के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। कैबिनेट के सभी मंत्रियों ने इसमें हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम काफी उपयोगी साबित हुआ। प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 10 खरब डॉलर के बारे में व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई। मंथन के तहत प्रदेश के विकास के लिए चिह्नित पांच प्राथमिकता वाले सेक्टरों में बेहतर कार्य के लिए विचार-विमर्श किया गया। 
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उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास, निवेश की संभावनाओं को बढ़ाने और पर्यटन के क्षेत्र में विकास पर मंथन किया गया। एक जिला-एक उत्पाद योजना पर कारगर ढंग से बढ़ने की कार्ययोजना भी तैयार की। प्रदेश के अंदर तीन एक्सप्रेस-वे की कार्ययोजना तैयार की गई। इससे होने वाले लाभों पर भी बात हुई। हम 24 घंटे बिजली आपूर्ति करने के लिए कार्ययोजना तैयार कर रहे हैं। 
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ग्रोथ रेट को आगे बढ़ाने वाले विकास कार्यों पर विस्तार से चर्चा हुई। निवेश बढ़ाने के लिए बेहतर कानून-व्यवस्था जरूरी है, इसके लिए लगातार ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। परिणाम भी सामने हैं। उन्होंने कहा कि शासन के विभागों और उपसमितियों के माध्यम से मंथन कार्यक्रम लगातार चलता रहेगा। इसके लिए आईआईएम की निदेशक को एक प्रोग्राम तैयार करने के लिए भी कहा है। 

शासन-प्रशासन की विश्वसनीयता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण

मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन-प्रशासन को विश्वसनीयता का प्रतीक बनाया जाना हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है। लोकतंत्र की कसौटी पर खरा उतरने के लिए ‘मंथन’ जैसे कार्यक्रम जरूरी हैं। इसके लिए उन्होंने आईआईएम की निदेशक प्रो. अर्चना शुक्ला से एक उपयोगी कार्यक्रम तैयार करने का आग्रह किया था। 

उन्होंने कहा कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। आम तौर पर यह धारणा होती है कि शासन-प्रशासन में बैठे लोग पूर्ण, सर्वज्ञ और सर्वशक्तिमान होते हैं, लेकिन यह उचित नहीं है। जो ऐसा मानने लगता है, उसमें गिरावट और पतन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।  
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