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अब आपके दांत बताएंगे आप अपराधी हैं या नहीं?

Wed, 19 Aug 2015 04:05 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला,लखनऊ Updated Wed, 19 Aug 2015 04:05 PM IST
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Now criminal can caught from tooth analysis

देश के हर कोने में हर दिन हजारों की संख्या में अपराध हो रहे हैं। अपराधी सुबूत के अभाव में खुली हवा में सांस लेते हैं और पुलिस कुछ कर नहीं पाती है। इसी का प्रमाण है कि निठारी कांड, मोहनलालगंज रेपकांड, आरुषि कांड और बदायूं कांड जैसी बड़ी घटनाओं का साक्ष्य के अभाव में समय पर खुलासा नहीं हो सका।

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जांच पड़ताल में इतना लंबा समय लग गया कि कई जरूरी सुबूत पूरी तरह नष्ट हो गए। इसी का नतीजा है कि ऐसे मामलों में कंविक्शन रेट आठ फीसदी है। ये जानकारी मंगलवार को केजीएमयू के ओरल पैथोलॉजी विभाग की ओर से आयोजित कार्यशाला में एम्स दिल्ली के फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के डॉ. आदर्श कुमार ने दी।
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वह सीबीआई और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के लिए विशेषज्ञ के तौर पर काम करते हैं। उन्होंने बताया कि अपराध की जांच में दांतों का बहुत बड़ा रोल होता है।

दांतों की जांच से घटना के राज खुल सकते हैं। देश में जांच टीम में ऑडोंटोलॉजिस्ट के न होने से कई अपराध दब जाते हैं और आरोपी आजाद घूमता है। यूपी के मामले में स्थिति बेहद खराब है।
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वो कहते हैं कि पोस्टमार्टम टीम में फॉरेंसिक डेंटिस्ट का भी रोल महत्वपूर्ण होता है। फॉरेंसिक डेंटिस्ट की मौजूदगी से कई बिंदु पूरी तरह स्पष्ट हो जाते हैं और पुलिस इस आधार पर जांच को गति दे सकती है।

डिजिटल पैथालॉजी से हो सकती है बेहतर जांच

Now criminal can caught from tooth analysis

किंगडम ऑफ साउदी अरेबिया के डॉ.शकील एम ने बताया कि फॉरेंसिक मेडिसन में डिजिटल पैथालॉजी सबसे कारगर है। इसके द्वारा पैथालॉजी के नमूने को 20 से 25 साल तक सुरक्षित किया जा सकता है।

आईजी टेक्निकल सर्विस के एडीजी आरके विश्वकर्मा ने बताया कि प्रदेश में ए और बी कैटेगरी की आठ फॉरेंसिक लैब खोली जाएंगी। जिनमें ए कैटेगरी में कन्नौज और गाजियाबाद और बी कैटेगरी में सहारनपुर, अलीगढ़, फैजाबाद और बरेली होगा।

इन लैबों में डीएनए, बायोलॉजिकल डॉक्यूमेंट सुरक्षित रखे जाएंगे। इनकी सहायता से जटिल केसों को सुलझाने में मदद मिलेगी।

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